'BRS नेता अपने फार्महाउस खोने के डर से HYDRA का विरोध कर रहे', तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी का आरोप
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के नेता राज्य सरकार की नवगठित हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी(HYDRA ) का विरोध इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके फार्महाउस ध्वस्त कर दिए जाएंगे।
रेड्डी ने कहा कि हाइड्रा उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी जिन्होंने जल निकायों और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करके इमारतें बनाई हैं।

बीआरएस नेताओं पर आरोप
रेवंत रेड्डी ने बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (केटीआर) और विधायक टी हरीश राव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने फार्महाउस की वैधता के सत्यापन की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर एक फैक्ट-फाइंडिंग समिति बनाई जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। रेड्डी ने कहा, "अगर आपने जल निकायों पर अवैध कब्जा नहीं किया है और सरकारी आदेशों का उल्लंघन नहीं किया है, तो डरने की क्या जरूरत है?"
सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राज्य की प्रगति और रियल एस्टेट क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने सरकारी अनुमति से अपने घर बनाए हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।
मुसी पुनरुद्धार परियोजना पर बयान
रेवंत रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि बीआरएस नेता मुसी पुनरुद्धार परियोजना के नाम पर नाटक कर रहे हैं, ताकि अपने फार्महाउस को बचा सकें। उन्होंने कहा कि बीआरएस नेता अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और वे जनता को ढाल के रूप में इस्तेमाल करके अपने अवैध कब्जों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं।
अवैध संरचनाओं के खिलाफ हाइड्रा की कार्रवाई
हाइड्रा ने शहर में कई अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया है, जिसमें तेलुगु सुपरस्टार नागार्जुन की संपत्तियां भी शामिल हैं। हाइड्रा का उद्देश्य हैदराबाद में सरकारी जमीनों और जल निकायों पर अवैध कब्जों को हटाना और शहर के पर्यावरण और संपत्तियों की सुरक्षा करना है।
तेलंगाना में हाइड्रा एजेंसी की कार्रवाई और बीआरएस नेताओं के विरोध के बीच विवाद गहरा हो गया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बीआरएस नेताओं पर अपने निजी स्वार्थों के लिए विरोध करने का आरोप लगाया है, जबकि बीआरएस नेताओं का कहना है कि यह परियोजना किसानों और आम लोगों के खिलाफ है।












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