तेलंगाना: बागियों ने बढ़ाई TRS और कांग्रेस की मुश्किलें, अगले तीन दिन होंगे काफी अहम
हैदराबाद। तेलंगाना विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक दलों को बागियों का डर सता रहा है। कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के लिए अगले तीन दिन काफी अहम साबित होने वाले हैं। इन दोनों पार्टियों को नामांकन वापस लिए जाने की तारीख तक इंतजार करना होगा कि बगावत करने वाले कितने नेता मैदान में रह जाते हैं। देरी से प्रत्याशियों की घोषणा करने के कारण अधिक मुश्किल कांग्रेस के लिए दिखाई दे रही है।

कुछ सीटों पर बागियों की मौजूदगी परिणाम बदल कर सकती है
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों का ऐलान काफी देरी से किया था। हालांकि टीआरएस के पास बागियों को मनाने का समय था क्योंकि पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा जल्दी कर दी थी। बीजेपी को भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बगावती तेवर का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सीटों पर बागियों की मौजूदगी परिणामों को बदल कर सकती है।

टीआरएस और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं
टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू पार्टी से नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने बागियों को वापसी के लिए राजी करने के लिए एक समिति नियुक्त की है। जबकि टीआरएस के केटी रामा राव और टी हरिश राव अपने नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, राजनीतिक दल अपने नेताओं को मनाने के साथ दूसरे दलों के बागियों को मैदान में बने रहने के लिए दांव भी चलते नजर आ रहे हैं।

तेलंगाना में बागियों ने बढ़ाई राजनीतिक दलोंं की बेचैनी
सेरिलिमगमपल्ली में, पूर्व विधायक बिक्षापति यादव ने टीडीपी उम्मीदवार भव्या आनंद प्रसाद के खिलाफ बागी नेता के रूप में अपना नामांकन कर दिया। खैरताबाद में टीआरएस नेता गोवर्धन रेड्डी टीआरएस उम्मीदवार नागेंद्र के खिलाफ मैदान में हैं। पूर्व गृह मंत्री सबिता इंद्र रेड्डी के बेटे ने राजेंद्रनगर से अपना नामांकन भरा है। हालात ये हैं कि टीआरएस को 25 से अधिकसीटों पर बगावत का सामना करना पड़ रहा है।












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