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Teachers Day 2025: इस आदेश ने शिक्षकों की उड़ाई नींद, सरकारी नौकरी गंवाने का सता रहा भय

Teachers Day 2025: शिक्षक दिवस से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने देश भर के लाखों शिक्षकों को संकट में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं के शिक्षकों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। जिसने शिक्षकों की नींद उड़ा दी है, देश भर के शिक्षकों को अपनी वर्षों पुरानी नौकरी जाने का खतरा सता रहा है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

Teachers Day

शिक्षक को TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण किए बिना सेवा में रहने की अनुमति नहीं होगी। यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू होता है जिनकी नियुक्ति RTE अधिनियम लागू होने से पहले या बाद में हुई हो।

TET पास नहीं किया तो चली जाएगी नौकरी

यदि कोई शिक्षक दो साल के भीतर TET पास नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि अभी पांच साल से अधिक बची है, उन्हें भी नौकरी में बने रहने के लिए इस समय सीमा का पालन करना होगा। टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है, लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति के सभी लाभ प्रदान किए जाएंगे।

शिक्षकों को प्रमोशन के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के प्रमोशन के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जिन शिक्षकों की नौकरी पांच साल से कम बची है, वे टीईटी उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को एक बड़ी पीठ के विचारार्थ भेज दिया है। यह फैसला शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से दिया गया है, ताकि शिक्षा प्रणाली में सुधार लाया जा सके।

अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है?

शिक्षक दिवस से पहले सुप्रीम कोर्ट का ये निर्णय शिक्षकों के लिए बेहद कठोर और असंवेदनशील प्रतीत हुआ, जिससे उनमें निराशा छा गई है। इस आदेश पर, बड़े-बड़े कानूनी विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों ने भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि 25 साल पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को मौजूदा चयन मानदंडों के आधार पर अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है, जबकि भारतीय कानून सभी नागरिकों के आजीविका के अधिकार की रक्षा करता है।

जब इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, तब उन्होंने सभी निर्धारित सेवा शर्तों को पूरा किया था और उसी आधार पर उनका चयन हुआ था। वे पिछले 20-25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब उनसे कहा जा रहा है कि वे वर्तमान शिक्षक भर्ती की शर्तों को पूरा करें, अन्यथा उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

कितने शिक्षक होंगे प्रभावित?

इस फैसले से कितने शिक्षक प्रभावित होंगे, इसका कोई देशव्यापी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 2 लाख और मध्य प्रदेश में करीब 3 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी परीक्षा पास नहीं की है और वे इस नियम के दायरे में आएंगे।

सरकार ने क्‍यों छिपाया ये संशोधन?

गौरतलब है कि भारत सरकार का 9 अगस्त 2017 का एक संशोधन (अमेंडमेंट) सार्वजनिक किया गया, जिसनें शिक्षकों में और अधिक चिंता बढ़ गई। यह सवाल उठने लगे कि सरकार ने इतने महत्वपूर्ण संशोधन को आम जनता और प्रभावित होने वाले शिक्षकों से क्यों छुपा कर रखा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के इस कठोर निर्णय के पीछे भारत सरकार का 9 अगस्त 2017 का यही संशोधन है, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसी संशोधन के कारण सुप्रीम कोर्ट को ऐसा सख्त फैसला लेना पड़ा।

क्‍या है ये संशोधन?

भारत सरकार के 2017 के इस संशोधन में नियम के सेक्शन 23(2) को केंद्र सरकार ने 9 अगस्त 2017 को समाप्त कर दिया और उसका नया प्रावधान (proviso) बना दिया। इसमें स्पष्ट लिखा है कि अब भारत में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-8) पर कोई भी शिक्षक बिना TET के सेवा में नहीं रह सकता। वे शिक्षक जो सेवा में हैं और TET पास नहीं हैं, उन्हें इस संशोधन (अगस्त 2017) के चार साल के भीतर, यानी अगस्त 2021 तक, TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा, उन्हें सेवा के लिए अयोग्य घोषित कर हटा दिया जाएगा।

शिक्षकों के साथ इतना बड़ा छल क्यों किया?

आश्चर्य की बात यह है कि भारत सरकार ने यह संशोधन किया और राज्यों को भेजा, लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारों ने इसे सार्वजनिक किया। इससे यह सवाल उठता है कि सरकार और राज्य सरकारों ने शिक्षकों के साथ इतना बड़ा छल क्यों किया। उपरोक्त संशोधन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त हुए सभी शिक्षकों को TET पास करना आवश्यक है। यह प्रश्न अनुत्तरित है कि RTE 2017 अधिनियम को देश की जनता और प्रभावित शिक्षकों से क्यों छिपाया गया था।

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