क्या AI की वजह से गईं TCS की 12,000 नौकरियां? CEO ने बताया इसके पीछे का असली कारण
TCS layoffs 2025: भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसने देश और दुनिया के तकनीकी और कॉर्पोरेट सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने कहा है कि वह इस साल करीब 12,261 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है, जो उसकी कुल वर्कफोर्स का लगभग 2% हिस्सा है।
यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर लगातार बढ़ रहा है और टेक इंडस्ट्री में यह चिंता गहराती जा रही है कि AI के चलते लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

अब TCS के इस फैसले के पीछे की पूरी कहनी क्या है अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है, हालांकि TCS के CEO का कहना है कि यह छंटनी AI की वजह से नहीं, बल्कि स्किल्स की कमी और तैनाती में दिक्कत के चलते की जा रही है। लेकिन कंपनी के आधिकारिक बयान और कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह फैसला AI के युग में टिके रहने की एक रणनीति है, जहां कंपनियां खुद को ज्यादा स्मार्ट, ऑटोमेटेड और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही हैं।
TCS CEO statement on AI: के. कृतिवासन ने क्या कहा?
TCS के CEO के. कृतिवासन (K Krithivasan) ने MoneyControl को दिए एक साक्षात्कार में इस छंटनी को "कठिन लेकिन जरूरी फैसला" बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला AI द्वारा दी जा रही उत्पादकता में वृद्धि (Productivity Gains) की वजह से नहीं लिया गया है।
TCS CEO के मुताबिक, यह छटनीं उन मामलों से जुड़ा है जहां हमारे पास स्किल Mismatch है, या जहां हम किसी कर्मचारी को तैनात नहीं कर पाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रक्रिया FY26 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के दौरान धीरे-धीरे लागू की जाएगी और यह किसी एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र या विभाग तक सीमित नहीं रहेगी। कृतिवासन ने यह भरोसा भी दिलाया कि छंटनी प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील तरीके से किया जाएगा।
TCS layoffs पर कंपनी ने दिया बयान
TCS के CEO जहां AI की भूमिका को नकारते नजर आए, वहीं कंपनी के आधिकारिक बयान में AI और ऑटोमेशन को छंटनी के फैसले की एक वजह बताया गया। कंपनी ने अपने बयान में कहा, "TCS एक Future-Ready संगठन बनने की दिशा में अग्रसर है।
इसके तहत हम नई तकनीकों में निवेश, नए बाजारों में प्रवेश, बड़े स्तर पर AI का इस्तेमाल, मजबूत साझेदारियां और नई पीढ़ी की इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। इसी क्रम में हमें अपने वर्कफोर्स मॉडल को भी दोबारा गढ़ना पड़ रहा है।"
बयान में यह भी जोड़ा गया कि TCS रिस्किलंग (reskilling) और रिडेवल्पमेंट (redeployment) पर काम कर रही है, लेकिन जहां यह संभव नहीं है, वहां कर्मचारियों को कंपनी से बाहर किया जाएगा। इस फैसले से सबसे ज्यादा मिड और सीनियर लेवल के कर्मचारी प्रभावित होंगे और यह प्रक्रिया पूरे साल भर में फेज़ वाइज चलेगी।
ChatGPT के आगमन के बाद बदलती तस्वीर
TCS का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ChatGPT जैसे AI टूल्स के आगमन को 30 महीने हो चुके हैं। इसने भारत की बड़ी आईटी कंपनियों के मैनपावर-आधारित बिज़नेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज दो हफ्ते पहले, भारत की तीसरी सबसे बड़ी IT कंपनी HCL Technologies ने भी ऑटोमेशन के चलते संभावित छंटनी का संकेत दिया था, खासतौर पर उन कामों में जो अब ग्रेजुएट्स की बजाय AI से करवाए जा सकते हैं।।
क्या AI से खतरे में हैं IT सेक्टर की नौकरियां?
TCS की यह छंटनी केवल एक कंपनी की नीति नहीं, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट है। भारत की IT इंडस्ट्री के उस परिवर्तन का हिस्सा है जहां कंपनियां अब कुशलता, लागत और टेक्नोलॉजी के संतुलन को प्राथमिकता दे रही हैं।
CEO कुछ भी कहें, लेकिन कंपनी का बयान और इंडस्ट्री की दिशा ये संकेत दे रही है कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव ला रहा है, और इसका असर सीधे तौर पर नौकरी पर पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में बाकी कंपनियां इस बदलाव के साथ कैसे कदम मिलाती हैं और कर्मचारी खुद को इस नई तकनीकी दुनिया के लिए कैसे तैयार करते हैं।












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