तपन बोस ने दोहराई अपनी बात-AFSPA की आड़ में लोगों को मारती है Indian Army

नई दिल्‍ली। सेना पर बयान देकर विवादों में घिरे डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍ममेकर तपन बोस ने एक चैनल को दिए इंटरव्‍यू में अपनी बात दोहराई है। उन्‍होंने कहा है कि उनके पास अपनी बात को साबित करने के लिए सुबूत भी हैं। तपन बोस ने बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन के दौरान इंडियन आर्मी की तुलना पाकिस्‍तान की सेना से की थी। उन्‍होंने कहा था कि पाक सेना की ही तरह भारत की सेना भी अपने लोगों को मारती है। तपन के इस बयान को जमकर विरोध हुआ और शाम तक सेना की तरफ से उनके बयान का जवाब भी दे दिया गया।

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पहले बोले सेना के खिलाफ नहीं बयान

न्‍यूज चैनल टाइम्‍स नाओ के साथ बातचीत में तपन ने कहा उन्‍होंने 'देश की सेना के खिलाफ' कोई बयान नहीं दिया है जैसा कि मीडिया के एक वर्ग की तरफ से बताया जा रहा है। तपन के शब्‍दों में, 'मैं सेना के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। मैंने बस इतना ही कहा कि भारत और पाकिस्‍तान की सेनाएं एक जैसी हैं। अगर आपको इसमें कुछ गलत लगता है तो यह आपकी राय हो सकती है। मैं आपको इससे रोक नहीं सकता हूं।' इसके बाद तपन से पूछा गया था कि क्‍या उन्‍हें पाकिस्‍तान में भी इसी तरह का बयान देने की आजादी मिल सकती थी? इस पर उन्‍होंने जवाब दिया, 'मैं पाकिस्‍तान में नहीं रहता हूं। मुझे नहीं मालूम कि मुझे पाकिस्‍तान में किस तरह की आजादी मिलेगी। मैं भारत में रहता हूं और मुझे मालूम है कि यहां मुझे क्‍या मिला हुआ है।'

'AFSPA की आड़ में मासूमों की जान लेती है सेना'

इसके बाद उनसे पूछा गया था कि उन्‍हें वाकई लगता है भारत की सेना नागरिकों को प्रताड़‍ित करती है और उन्‍हें मारती है? इस पर उन्‍होंने जवाब दिया, 'मेरे पास इस बात के सुबूत हैं कि अफस्‍पा (आर्म्‍ड फोर्सेज स्‍पेशल पावर एक्‍ट) की आड़ में इंडियन आर्मी मासूमों की जान लेती है। उन्‍हें इस बात के लिए कानूनी तौर पर मंजूरी मिलर है। यह कानून उन्‍हें ऐसा करने की ताकत देता है और वह संदेह होने पर भी किसी की जान ले सकते हैं। आप लोगों को कुछ नहीं मालूम है और आप लोगों ने कानून नहीं पड़ा है।' तपन ने कहा था, 'पाकिस्‍तान हमारा दुश्‍मन देश नहीं है। भारत और पाकिस्‍तान की सरकारें एक जैसी हैं। हमारी सेनाएं भी एक जैसी हैं। वहां की सेना अपने लोगों को मारती है और हमारी सेना यहां पर लोगों को मारती है। दोनों में कोई अंतर नहीं है।' बोस के बयान पर सेना की तरफ से प्रतिक्रिया दी गई थी। सेना ने कहा था, 'हमारे एक्‍शन पूरी तरह से देश को समर्पित होते हैं। सेना कभी भी जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती है।

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