'जबरन मुंडवाया सिर, यातनाएं दी', श्रीलंकाई नौसेना से रिहा हुए 5 मछुआरों ने लगाए सनसनीखेज आरोप
श्रीलंकाई नौसेना ने 27 अगस्त को तमिलनाडु के आठ मछुआरों को समुद्री सीमा पार करने के आरोप में हिरासत में लिया। इस दौरान उनकी नाव भी जब्त कर ली गई। 5 सितंबर को इस मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने श्रीलंकाई मुद्रा में 50,000 रुपये का जुर्माना भरने पर पांच मछुआरों को रिहा कर दिया।
वहीं, तीन अन्य मछुआरों को छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई, क्योंकि उन्हें दूसरी बार गिरफ्तार किया गया था। जब रिहा किए गए पांच मछुआरे 7 सितंबर को वापस घर लौटे, तो उनके परिवार यह देखकर हैरान हो गए कि उनके सिर जबरन मुंडवा दिए गए थे। परिवारों ने जुर्माना भरने और उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए पैसे उधार लिए थे।

रिहा किए गए मछुआरों ने बताया कि उन्हें हथकड़ी लगाई गई, उनके सिर जबरन मुंडवाए गए और 6 सितंबर तक जुर्माना न चुकाने के कारण उन्हें प्रताड़ित भी किया गया। एक मछुआरे राजा ने बताया कि, "हमें जबरन ले जाया गया और हमारे सिर मुंडवा दिए गए। उन्होंने हमें बताया कि हमें चार महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई है और हमसे जेल का इलाका साफ करवाया गया।"
वहीं, एक अन्य मछुआरे किंगसन ने अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया, 'जब उन्हें पता चला कि हम भारतीय हैं तो वे भड़क गए। हम अपराधी नहीं हैं हम सिर्फ़ जीविका कमाने के लिए मछली पकड़ रहे थे। उन्होंने हमें तीन दिनों तक जेल और नाले साफ करने के लिए मजबूर किया।'
इस घटना से पीड़ित परिवारों और स्थानीय समुदायों में आक्रोश फैल गया है। वे न्याय की मांग कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राजनयिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। वहीं, शेष तीन मछुआरे जिन्हें छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई है, उनके परिवार उनकी भलाई के बारे में चिंतित हैं और उनकी रिहाई के लिए उपाय तलाश रहे हैं।












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