Tahawwur Rana की वापसी भारत की कूटनीति की जीत! क्या अब फंस गया पाकिस्तान? कसाब वाला पैंतरा न आएगा काम
Tahawwur Rana News: 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों, जिन्हें '26/11' के नाम से जाना जाता है, ने पूरे दुनिया को हिला कर रख दिया था। इन हमलों में 9 आतंकवादियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाया था। जिसमें 175 लोग मारे गए थे। 17 साल बाद अब मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Attack) के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सहयोगी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया जा रहा है।
वर्तमान में लॉस एंजिल्स के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं। बताया जा रहा है कि भारत में आते ही राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कड़ी निगरानी में हिरासत में रखा जाएगा। खास बात यह है कि अमेरिका से उसका प्रत्यर्पण (Extradition) न सिर्फ भारत की कूटनीति (Indian Diplomacy) ताकत का सबूत है, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी एक बड़ा झटका है। इस बार न पाकिस्तान "कसाब स्टाइल" बहाने बना पाएगा, न ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को बचा पाएगा। आइए जानते हैं भारत की कूटनीति की जीत कैसे?

क्यों बेकसूर नहीं साबित हो सकता पाकिस्तान?
कसाब की तरह पाकिस्तान अब नागरिकता से इनकार नहीं कर सकता। राणा सिर्फ गवाह नहीं, बल्कि प्लानर और फंडर है, जिसने डेविड कोलमैन हेडली (David Coleman Headley) को सपोर्ट किया। उसके खिलाफ अमेरिका में सबूत और गवाही मौजूद हैं, जिन्हें भारत में कोर्ट में पेश किया जाएगा।
तहव्वुर राणा की भूमिका: प्लान A से लेकर Execution तक
1990 में तहव्वुर हुसैन राणा पाकिस्तान सेना की मेडिकल कोर में काम करता था, इसके बाद में कनाडा में रहने लगा। 1992 में, शिकागो में 'इमिग्रेशन सर्विस' नामक कंपनी शुरू करते हैं। 2006-2008 में, तहव्वुर का दोस्त डेविड हेडली पाकिस्तान और भारत की यात्रा करता है। वह लश्कर-ए-तैयबा और ISI के साथ संपर्क में होता है। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमला होता है, जिसमें 175 लोग मारे जाते हैं और सैकड़ों घायल होते हैं। जांच में हेडली और राणा की भूमिका सामने आती है। हमले से कुछ दिन पहले खुद मुंबई आया, होटल में रुका, प्लानिंग को अंजाम दिया।
नहीं चलेगा कसाब वाला पाकिस्तान का पुराना पैंतरा
2008 के हमलों के बाद पकड़े गए अजमल कसाब की नागरिकता को पाकिस्तान ने शुरू में नकार दिया था। बाद में सबूतों और दबाव के चलते उसे पाकिस्तानी नागरिक मानना पड़ा। यह बहाना अब तहव्वुर राणा पर नहीं चलेगा, क्योंकि केस इंटरनेशनल लीगल फ्रेमवर्क के तहत तैयार है।

17 साल क्यों लगे प्रत्यर्पण में?
- अक्टूबर 2009: एफबीआई ने राणा को शिकागो में गिरफ्तार किया, उन पर विदेशी आतंकवादी संगठन को समर्थन देने का आरोप लगाया गया।
- दिसंबर 2019: भारत सरकार ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत किया।
- जून 2020: राणा को लॉस एंजिल्स में दोबारा गिरफ्तार किया गया, जब भारत ने उनके प्रत्यर्पण के लिए अस्थायी गिरफ्तारी का अनुरोध किया।
- मई 16, 2023: कैलिफ़ोर्निया की अमेरिकी जिला अदालत ने राणा के भारत में प्रत्यर्पण को मंजूरी दी, यह मानते हुए कि उनके खिलाफ पर्याप्त प्रमाण हैं।
- अगस्त 2023: राणा ने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ "हैबियस कॉर्पस" याचिका दायर की, जिसे अमेरिकी अदालत ने खारिज कर दिया।
- अगस्त 15, 2024: नाइंथ सर्किट के अमेरिकी संघीय अपील न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखते हुए राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी।
- नवंबर 13, 2024: राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर की।
- जनवरी 21, 2025: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की याचिका खारिज कर दी, जिससे भारत में उनके प्रत्यर्पण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
- फरवरी 14, 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में घोषणा की कि राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी गई है।
टाइमलाइन में समझें 26/11 हमला
🔴26 नवंबर 2008:
- रात 9:30 बजे: आतंकवादियों ने कोलाबा के निकट समुद्री मार्ग से मुंबई में प्रवेश किया और दो समूहों में विभाजित हो गए।
- रात 9:48 बजे: लियोपोल्ड कैफ़े पर गोलीबारी शुरू हुई, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए।
- रात 10:00 बजे: छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेलवे स्टेशन पर दो आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें दर्जनों लोग हताहत हुए।
- रात 10:30 बजे: ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, ताज महल पैलेस होटल और नरीमन हाउस (यहूदी समुदाय केंद्र) पर हमले शुरू हुए।
🔴27 नवंबर 2008: सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया। नरीमन हाउस में बंधकों को मुक्त कराने का प्रयास किया गया।
🔴28 नवंबर 2008: ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस को सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में लिया, अधिकांश आतंकवादी मारे गए।
🔴29 नवंबर 2008: ताज महल होटल में अंतिम आतंकवादियों के खिलाफ अभियान समाप्त हुआ।
अब क्या करेगा पाकिस्तान?
- राणा की वापसी से पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ेगा।
- इस बार भारत के पास ऐसे साक्ष्य और गवाह हैं, जिन्हें झुठलाना नामुमकिन है।
- अब देखना ये है कि पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क के प्रति क्या रुख अपनाता है।
भारत-अमेरिका संबंधों की सफलता
- राणा का भारत आना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते विश्वास और तालमेल का नतीजा है।
- डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद अमेरिका ने इसके लिए हामी भरी थी।
हालिया कूटनीतिक जीतें
- तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण: 26/11 हमले के आरोपी को अमेरिका से भारत लाना।
- चीन सीमा पर वैश्विक समर्थन: गलवान विवाद के बाद भारत ने कूटनीतिक दबाव बनाकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया।
तहव्वुर राणा की भारत वापसी सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, ये दुनिया को दिया गया भारत का साफ संदेश है - "हम न भूलते हैं, न छोड़ते हैं।" अब पाकिस्तान के पास कसाब वाला कोई बचाव नहीं बचा, और भारत एक-एक गुनहगार को कानून के कटघरे में लाने के लिए तैयार है।
सोर्स- बीबीसी, रायटर्स, FDD's लॉग वॉर जर्नल












Click it and Unblock the Notifications