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संदिग्ध टेस्टिंग: तो भारत में कोरोना मामलों में आई गिरावट की ये है असल वजह?

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नई दिल्ली। भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना महामारी संक्रमण के दूसरे दौर ने गुज रही है, लेकिन भारत में कोरोना के नए मामलों में आई गिरावट को लेकर सवाल उठ रहा है। माना जा रहा है कि भारत में यह गिरावट संदिग्ध टेस्टिंग की वजह से हो सकती है। सितंबर के मध्य में भारत ने रोजाना 97,000 से अधिक नए मामलों के शिखर छू लिया था, लेकिन अब यह संख्या आधी से भी कम हो गई है। दक्षिण एशियाई राष्ट्रों में रोजाना नए मामलों में आई इस महत्वपूर्ण गिरावट ने कोरोना टेस्टिंग पर बड़ा सवाल खड़ा किया है, जो यहां की वास्तविक स्थिति पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं?

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    भारत में संक्रमितों की संख्या करीब 90 लाख के आंकड़े को छू चुकी है

    भारत में संक्रमितों की संख्या करीब 90 लाख के आंकड़े को छू चुकी है

    गौरतलब है गुरुवार को भारत में संक्रमितों की संख्या करीब 90 लाख के आंकड़े को छू चुकी है और आधिकारिक संख्या भारत में संक्रमण में गिरावट को दिखा रही है। एक समय सर्वोच्च केसलोड के साथ अमेरिका से आगे निकलने के लिए तैयार दिख रहे भारत में पिछले हफ्तों तक 50,000 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, जबकि पूरे अमेरिका में संक्रमण आसमान छूता दिख रहा है। भारत भले ही कोरोना पर नियंत्रण प्राप्त करता दिख रहा है, लेकिन भारत में नए मामलों की धीमी गति के लिए संदिग्ध टेस्टिग और संदिग्ध किट को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

    महामारी के शुरुआती दिनों से भारत में रोजाना टेस्टिंग में काफी बेहतर है

    महामारी के शुरुआती दिनों से भारत में रोजाना टेस्टिंग में काफी बेहतर है

    करीब 140 करोड़ आबादी वाले भारत में रोजाना टेस्टिंग में महामारी के शुरुआती दिनों से काफी ऊपर उठा है। वर्तमान में लगभग 10 लाख टेस्टिंग रोज हो रही है, लेकिन यह अभी भी उच्च संक्रमण वाले अधिकांश देशों की तुलना में बहुत कम है। भारत में आधे टेस्टिंग नतीजे कम विश्वसनीय रैपिड एंटीजन टेस्ट से आते हैं, जो 50 फीसदी झूठी निगेटिव रिपोर्ट कर सकते हैं, जिसका परिणाम है कि भारत के कोरोना मामले राष्ट्रीय संख्या की तुलना में बहुत अधिक हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि भारत में नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ सकते हैं, क्योंकि शादियों के मौसमों का जश्न और हिंदू त्योहार आते हैं, जहां लोग इकट्ठा होते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन होता है।

    रैपिड एंटीजन टेस्ट बहुत विश्वसनीय नहीं हैं, संवेदनशील नहीं हैं: चिकित्सक

    रैपिड एंटीजन टेस्ट बहुत विश्वसनीय नहीं हैं, संवेदनशील नहीं हैं: चिकित्सक

    प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंसेज फ़ोरम के अध्यक्ष हरजीत सिंह भट्टी ने बताया कि रैपिड एंटीजन टेस्ट बहुत विश्वसनीय नहीं हैं, संवेदनशील नहीं हैं और मरीज़ों को बिल्कुल भी सही इलाज नहीं मिल रहा है। महामारी शुरू होने के बाद से दिल्ली के एक अस्पताल में फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर की काम करते आ रहे डा. भट्टी ने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले महीने दिल्ली में बहुत खतरनाक होंगे।

    अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में RT-PCR टेस्ट का उपयोग किया जाता हैं

    अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में RT-PCR टेस्ट का उपयोग किया जाता हैं

    उल्लेखनीय है अमेरिका और ब्रिटने जैसे बड़े कोरोना प्रभावित अधिकांश देशों में आरटी-पीसीआर टेस्टिंग का उपयोग किया जाता हैं, जो अधिक विश्वसनीय नतीजे देने में अधिक समय लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रैपिड एंटीजन तेजी से बढ़ रहे मामलों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि प्रमुख देश का सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र कहां हैं, लेकिन संचरण के सटीक आकलन के लिए आरटी-पीसीआर टेस्टिंग का पालन किया जाना चाहिए। नई दिल्ली स्थित पीपुल्स हेल्थ के वैश्विक समन्वयक टी. सुंदररमन के मुताबिक रैपिड एंटीजन टेस्ट्स में झूठी निगेटिव दरें बहुत अधिक हो सकती हैं, इसलिए टेस्टिंग के लिए आरटी-पीसीआर के साथ पालन करना चाहिए, जो भारत में लगभग नहीं किया गया है।

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    English summary
    The corona epidemic is undergoing a second round of infection across the world, including India, but questions are arising about the decline in new cases of corona in India. It is believed that this decline in India may be due to suspected testing. In mid-September, India touched the peak of over 97,000 new cases daily, but now the number has come down by half. This significant drop in new cases daily in South Asian nations has raised a big question on Corona Testing, which questions the actual situation here?
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