चीन की साजिश का खुलासा! लद्दाख में भारत के पावर ग्रिड सिस्टम को हैकर्स ने बनाया निशाना
नई दिल्ली, 07 अप्रैल: चीन ने एक बार फिर भारत की सुरक्षा में सेंधमारी की है। खुफिया जानकारियां रखने वाली कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर (Recorded Future Inc.) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाइनीज हैकर्स पिछले कुछ महीनों (अगस्त-मार्च) से भारत के पावर ग्रिड्स सिस्टम को अपना निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ने उत्तरी भारत के कम से कम सात लोड डिस्पैच सेंटर्स को टारगेट किया है। इन सेंटरों का काम भारत-चीन बॉर्डर और लद्दाख के पास मौजूद इलाकों में ग्रिड नियंत्रण और बिजली पहुंचाने के लिए रियल टाइम ऑपरेशनों को अंजाम देना है। रिपोर्ट में बताया कि चीन ने साइबर जासूसी अभियान के तहत भारत की बिजली सेक्टर को निशाना बनाया है। इस मामले में भारत के ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि लद्दाख के पास बिजली वितरण केंद्रों को निशाना बनाने के लिए चीनी हैकरों द्वारा दो प्रयास किए गए, लेकिन सफल नहीं हुए। ऐसे साइबर हमलों का मुकाबला करने के लिए हमने अपनी रक्षा प्रणाली को पहले ही मजबूत कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये सातों लोड डिस्पैच सेंटर लद्दाख में विवादित भारत-चीन बॉर्डर के आसपास के इलाकों में ग्रिड कंट्रोल के लिए रियल-टाइम ऑपरेशन और बिजली पहुंचाने का काम करते हैं। इन लोड डिस्पैच सेंटर्स में से एक को पहले भी रेड ईको नाम का हैकिंग ग्रुप टारगेट कर चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पावर ग्रिड्स को लंबे समय तक निशाना बनाने से चीनी सरकार से जुड़े ग्रुप्स को इकॉनमिक और पारंपरिक इंटेलिजेंस जुटाने का काफी मौका मिल जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रिड्स को निशाना बनाकर चीन की सरकार बॉर्डर पर भारत के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर्स के बारे में जानकारी को हासिल करना चाहती थी। ऐसा करके चीन आगे रणनीति तय कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि हैकर्स ने इंडियन नैशनल इमर्जेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और एक मल्टीनेशनल लॉजिस्टिक कंपनी की सब्सिडियरी की सुरक्षा में भी सेंधमारी की है।
रिकॉर्डेड फ्यूचर के सीनियर मैनेजर जोनाथन कोंद्रा का कहना है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस और कैमरों का इस्तेमाल करके घुसपैठ करना काफी आम है। वहीं, इस डिवाइस का इस्तेमाल ताइवान और दक्षिण कोरिया में घुसपैठ के लिए भी किया जा चुका है। इससे पहले 2021 में रिकॉर्डेड फ्यूचर ने यह भी पता लगाया था कि 2020 में गालवान घाटी में हुए संघर्ष के महीनों बाद एक चीनी मैलवेयर भारतीय पावर ग्रिड में व्याप्त पाया गया था।












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