पराली जलाने पर SC सख्त, पंजाब और हरियाणा सरकारों को लगाई फटकार, कहा- कार्रवाई करें
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों पर पराली जलाने की समस्या को नियंत्रित करने में विफल रहने के कारण कड़ी आलोचना की है। 23 अक्टूबर को अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को समन जारी किया।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, अहसानुद्दीन अमनउल्लाह, और ऑगस्टिन जॉर्ज मैश की पीठ ने पराली जलाने पर कार्रवाई न करने के लिए सरकारों पर नाराजगी जताई, खासकर तब जब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पहले ही जून 2021 में निर्देश जारी किए थे।

पराली जलाने से NCR में प्रदूषण का बढ़ना
पराली जलाने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण में भारी योगदान होता है। हर साल सर्दियों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है, जिसका प्रमुख कारण पड़ोसी राज्यों में धान की फसल के बाद पराली जलाने की प्रक्रिया है। अदालत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकारें इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने में विफल रही हैं।
पंजाब की सरकार पर कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले तीन वर्षों में पंजाब सरकार ने पराली जलाने के अपराधियों पर कोई मुकदमा नहीं चलाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर केवल मामूली जुर्माना लगाने और इस समस्या को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। अदालत ने राज्य द्वारा ISRO डेटा पर निर्भरता की आलोचना की, जो आग की घटनाओं का डेटा प्रदान करता है, जबकि राज्य ने ऐसी घटनाओं से अनभिज्ञता जताई।
पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने अदालत के सामने निर्देशों को लागू करने में आई कठिनाइयों को स्वीकार किया और बताया कि अपराधियों के राजस्व रिकॉर्ड को चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि राज्य ने छोटे किसानों की मदद के लिए केंद्र से ट्रैक्टर और अन्य उपकरणों की मांग क्यों नहीं की।
CAQM की कार्यप्रणाली पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को भी अप्रभावी करार दिया और उसके द्वारा दिए गए निर्देशों के उचित कार्यान्वयन की कमी पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने केंद्र सरकार पर भी यह आरोप लगाया कि उसने CAQM में प्रदूषण विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की है। इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने आयोग के सदस्यों की योग्यता का बचाव किया, लेकिन पीठ ने इसे अस्वीकार कर दिया और विशेषज्ञ एजेंसियों को शामिल करने की सिफारिश की।
आगे की दिशा और कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी NCR राज्यों को निर्देश दिया है कि वे 30 अप्रैल 2025 तक अपने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में खाली पदों को भरें और प्रदूषण से निपटने के लिए अपनी योजनाओं का विवरण पेश करें। अदालत ने CAQM के अध्यक्ष को भी निर्देश दिया कि वे धान के पुआल जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण के खिलाफ उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत करें।
पराली जलाने की समस्या से न केवल पंजाब और हरियाणा प्रभावित हैं, बल्कि इसका गंभीर प्रभाव NCR और दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर भी पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई यह कड़ी टिप्पणी राज्य सरकारों और संबंधित निकायों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि इस मुद्दे को हल करने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है। अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण से निपटने के लिए सभी प्रयास किए जाएं और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए।












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