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Supreme Court ने SIR विवाद पर सुनाया अहम फैसला, ममता बनर्जी ने खुद रखी अपनी दलीलें, कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

Supreme Court on SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर जारी राजनीतिक और कानूनी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में बुधवार, 4 फरवरी को एक अहम सुनवाई हुई।

इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी दलीलें भी खुद पेश की और कोर्ट से अनुरोध किया कि साल 2002 की मतदाता सूची के आधार पर मैप किए गए किसी भी मतदाता का नाम 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के नाम पर नई मतदाता सूची से न हटाया जाए।

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SIR case की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि एक अन्य याचिका भी लंबित है, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पहले ही अपना हलफनामा दाखिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि उस याचिका में उठाए गए मुद्दों का सीधा असर मौजूदा मामले पर पड़ेगा। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि उक्त याचिका को भी सोमवार को सूचीबद्ध किया जाए और स्पष्ट किया कि सभी संबंधित मामलों पर एक साथ सुनवाई होगी।

ECI को सुप्रीम कोर्ट की सख्त नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने SIR के तहत नोटिस जारी करने के तरीके को लेकर निर्वाचन आयोग को सावधान रहने को कहा। पीठ ने टिप्पणी की, ECI को नोटिस भेजते समय सावधानी बरतनी चाहिए। आप प्रतिष्ठित लेखकों और सार्वजनिक हस्तियों को इस तरह नोटिस नहीं भेज सकते।

यह टिप्पणी हाल ही में उन घटनाओं के संदर्भ में आई है, जब निर्वाचन आयोग ने SIR के तहत कई जानी-मानी हस्तियों को नोटिस भेजे थे। इनमें पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त), नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी शामिल हैं।

Mamata Banerjee SIR case: कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

आज की सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों याचिकाओं पर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

चुनाव आयोग को फटकार: अमर्त्य सेन जैसे दिग्गजों को नोटिस भेजे जाने के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "नोटिस सावधानी से भेजें। आप प्रतिष्ठित लेखकों और सार्वजनिक हस्तियों को इस तरह (SIR के दायरे में) बाहर नहीं रख सकते या परेशान नहीं कर सकते।"

सॉलिसिटर जनरल की दलील: सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि एक अन्य याचिका भी लंबित है, जिसमें चुनाव आयोग पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि उस मामले के मुद्दे इस केस पर भी असर डालेंगे।

अगली सुनवाई सोमवार को: कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी संबंधित मामलों को एक साथ जोड़कर सोमवार को सुना जाए। अदालत उस दिन सभी पहलुओं पर एक साथ विचार करेगी।

ममता बनर्जी ने क्या कहा: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत के रुख का स्वागत किया। उन्होंने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया।

Mamata Banerjee SIR case: किन याचिकाओं पर हुई सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। ये याचिकाएं मोस्तरी बानू, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।

Supreme Court का पहले का रुख

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को इस मामले में कुछ अहम निर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मतदाता को अनावश्यक असुविधा न हो। अदालत ने यह भी कहा था कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और निष्पक्षता बरती जाए।

Mamata Banerjee vs EC: चुनाव आयोग पर हमलावर ममता

इस सुनवाई से पहले ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से समर्थन मांगा। ममता बनर्जी इन दिनों SIR के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं।

एक दिन पहले वह अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इस मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलने पहुंची थीं, लेकिन बैठक को बीच में छोड़कर बाहर निकल आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अहंकार दिखाया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया।

"तृणमूल समर्थकों के नाम हटाए जा रहे"

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, वे मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के समर्थक हैं। उन्होंने दावा किया कि हटाए गए नामों में लगभग शत-प्रतिशत तृणमूल समर्थकों के हैं। ममता बनर्जी ने कहा,शत-प्रतिशत नाम तृणमूल कांग्रेस के लोगों के हैं। एक-दो नाम शायद साख बचाने के लिए अन्य पार्टियों के होंगे। इस विरोध प्रदर्शन और अभियान में पश्चिम बंगाल के वे लोग भी शामिल रहे, जो कथित तौर पर SIR से प्रभावित हुए हैं और जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

क्या हैं इसके सियासी मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि SIR को लेकर यह कानूनी लड़ाई सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है।अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी और चुनाव आयोग की भूमिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

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