EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 7 दिन तक चली सुनवाई

नई दिल्ली, 27 सितंबर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानि EWS को नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी EWS आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिकपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 7 दिन तक सुनवाई की, इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आर्थि रूप से आरक्षण संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है, बल्कि उसे मजबूत देता है।

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तुषार मेहता ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में आर्थिक तौर पर न्याय की बात कही गई है। इस पूरे मामले में सभी पक्षों का तर्क सुनने के बाद चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बता दें कि सरकारी और निजी संस्थानों में प्रवेश और नौकरी में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस आरक्षण को चुनौती दी गई थी और इसे संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया गया था। सरकार का यह फैसला अधिकतम 50 फीसदी आरक्षण का भी उल्लंघन करता है। लेकिन इस मामले पर कोर्ट ने सात दिन तक सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 40 याचिकाकर्ताओं की अपील को सुना, जिसमे जनहित अभियान की याचिका भी शामिल है, जिन्होंने 2019 में याचिका दायर की थी। याचिका में संवैधानिक संशोधन 103 को चुनौती दी गई थी।
केंद्र सरकार ने भी इस मामले में याचिका दायर की थी और अपील की थी की सभी लंबित मामलों एक ही कोर्ट में ट्रांसफर करने की अपील थी। गौर करने वाली बात है कि लोकसभा और राज्यसभा ने 8-9 जनवरी को इस संशोधन को स्वीकृति दे दी थी, जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसपर हस्ताक्षर किया था।

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