सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई सहारा-बिरला डायरियों की जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सहारा-बिरला की डायरियों की जांच किए जाने की मांग की गई थी।
नई दिल्ली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें सहारा-बिड़ला की डायरियों की जांच की जाने की मांग की गई थी। एक एनजीओ द्वारा दायर की गई इस याचिका में सहारा और बिड़ला पर हुए आयकर के छापों की जांच करने की मांग की गई थी, जिसमें कुछ राजनीति के लोगों के नाम भी आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इस मामले में पुख्ता सबूतों की कमी है। 2014 में सहारा के दफ्तरों में छापे मारने के बाद सहारा की जो डायरियां मिली थीं, वह सभी कंप्यूटर प्रिंट आउट थे।

इन प्रिंट आउट में कई राजनीतिक लोगों के नाम थे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली की पूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित का नाम भी शामिल था। इस मामले में राहुल गांधी ने भी जांच की मांग की थी। उनका कहना था कि कुछ राजनीति लोगों को घूस दी गई थी। इस मामले की पैरवी प्रशांत भूषण कर रहे थे और इस मामले में एक स्पेशल इनवेस्टिगेटिंग टीम बनाने की मांग कर रहे थे। जिस बेंच के समझ यह याचिका रखी गई थी, उसमें जस्टिस अरुण मिश्रा और अमितावा राय थे।
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इस याचिका को अस्वीकार करते हुए बेंच ने यह महसूस किया कि इस जांच की मांग करते हुए जो दस्तावेज दिखाए थे, वह राजनीतिक लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सके। इसी के चलते बेंच ने इस याचिका को ठुकरा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी महसूस किया कि सिर्फ कंप्यूटर के प्रिंट आउट के दम पर इस तरह की कोई जांच करना सुरक्षित नहीं है। राहुल गांधी अक्सर इस बात को अपने भाषणों में उठाते हैं कि पीएम मोदी ने सहारा से रिश्वत ली है।












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