पद्मावत को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, MP राजस्थान सरकार की याचिका खारिज
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार की पद्मावत फिल्म की रिलीज रोकने की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंसा का हवाला देते हुए राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि फिल्म को हिंसा के आधार पर बैन नहीं किया जा सकता है। कोर्ट के इस फैसले के बाद फिल्म 25 जनवरी को देशभर में रिलीज होगी।

राज्य सरकारें अपने दायित्व को निभाए
कोर्ट ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि, सेंसर बोर्ड ने अपना काम कर दिया है। अब राज्य सरकारें अपने दायित्व को निभाए। कानून व्यवस्था आपकी जिम्मेदारी है। अराजक तत्वों को फिल्म रोक कर जगह नहीं दे सकते हैं। राजस्थान सरकार का पक्ष रख रहे अडिशनल सलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम कोर्ट से फिल्म पद्मावत पर रोक लगाने के लिए नहीं सिर्फ आदेश में कुछ बदलाव की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं।

आज पद्मावत शर्मिदा हो रही हैं
इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, 'लोगों को यह समझना होगा कि यहां एक संवैधानिक संस्था है और वैसे भी हमने इस संबंध में आदेश पारित कर दिया है।' वहीं करणी सेना का प्रमुख लोकेंद्र कलवी कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि, आज पद्मावत शर्मिदा हो रही हैं। यहीं नहीं फिल्म रिलीज होने पर हिंसा की भी धमकी दी।

सिनेमा हॉल को सुरक्षा मुहैया करवाएगी सरकार
कोर्ट के फैसले के बाद करणी सेना ने धमकी देते हुए कहा कि वह जनता की अदालत में जाएंगे। हमें तो पहले ही पता था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आने वाला है। करणी सेना ने कहा कि कोर्ट हिंदूओं की भावनाओं का ख्याल रखे। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार इस पर फैसला ले। कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा सरकार के मंत्री अनिल विज ने कहा कि, जो सिनेमा हॉल पद्मावत को रिलीज करेंगी सरकार उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाएगी। फिर भी सुप्रीम कोर्ट को लोगों की भावनाओं की ख्याल रखना चाहिए था।












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