शिवराज सिंह को SC का नोटिस, मंत्रिमंडल को लेकर पूर्व स्पीकर ने दायर की है याचिका
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एनपी प्रजापति की याचिका पर जारी किया है। प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल में नियम से ज्यादा मंत्री होने की बात कही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नोटिस जारी किया है।

याचिका में सदस्यों की संख्या से 15 फीसदी से ज्यादा मंत्री बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। प्रजापति ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि विधानसभा में जितनी सदस्य संख्या है उसके हिसाब से विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 10 फीसदी से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते। एमपी में 15 फीसदी बना गए हैं। शिवराज मंत्रिमंडल का आकार विधानसभा में सदस्यों की संख्या को देखते हुए वैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। वर्तमान विधानसभा सदस्यों की संख्या के मुताबिक 34 मंत्री नहीं बनाए जा सकते। ये वैधानिक व्यवस्था है लेकिन शिवराज सिंह ने इसके खिलाफ जाते हुए ज्यादा मंत्री बनाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, और विवेक तन्खा ने प्रजापति की पैरवी करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में 28 मंत्रियों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164 (1 ए) के स्पष्ट उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी कर रही है और मामले की सुनवाई करेगी।
शिवराज सिंह ने हाल ही में मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। 28 मंत्रियों की नियुक्ति की गई है, जबकि पूर्व में पहले से ही छह मंत्री नियुक्त किए गए थे। इस लिहाज से मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 34 हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 विधायक हैं। जिसके हिसाब से 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं लेकिन यहां पेंच ये है कि इस समय 206 ही विधायक हैं और 24 सीटें खाली हैं। ऐसे में अगर 206 विधायकों वाली विधानसभा के हिसाब के देखा जाए तो 30 मंत्री ही हो सकते हैं। इसी को लेकर ये याचिका दायर की गई है।












Click it and Unblock the Notifications