सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को फटकार, कहा-जल्द लागू करें वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना
नई दिल्ली, जून 11: कोरोना काल के दौरान प्रवासी मजदूरों को मुफ्त राशन देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को निर्देश दिए कि, पश्चिम बंगाल सरकार से बिना किसी बहाने के तुरंत एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड को लागू करे। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि, आप एक या दूसरी समस्या का हवाला नहीं दे सकते। यह प्रवासी श्रमिकों के लिए है।
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पश्चिम बंगाल सरकार की वकील ने कहा की आधार कार्ड की दिक्कतों की वजह से ये योजना लागू नही हो पाई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम आर शाह ने कहा की ऐसा कोई बहाना नहीं चलेगा। जब सारे राज्य ये कर चुके है तो पश्चिम बंगाल को क्या दिक्कत है। हर हाल में उसे ये योजना लागू करनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कोर्ट से इस बाबत सहमति जताई।
बता दें कि 'वन नेशन-वन राशन कार्ड' सिस्टम को 'नागरिक-केंद्रित सुधार' माना जाता है। इसका लक्ष्य देशभर की राशन दुकानों पर लाभार्थियों के लिए राशन सुनिश्चित करना है, खासकर प्रवासी मजदूर और परिवारों के लिए जो नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) या किसी दूसरी वेलफेयर स्कीम के तहत आते हैं। इस सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रवासी लाभार्थी, जो अस्थायी रोजगार या किसी दूसरी वजह से अपना निवास स्थान बार-बार बदलते रहते है, उनके पास अब देश में अपनी पसंद की किसी भी उचित दर दुकान पर लगे ई-पीओएस उपकरण पर बायोमेट्रिक/आधार कार्ड आधारित प्रमाणन द्वारा अपने उसी/मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके अपने कोटे से अनाज ले सकते हैं।
उधर सर्वोच्च अदालत ने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों द्वारा उठाए गए समस्याओं पर अपने फैसले को सुरक्षित रखा है। दरअसल लॉकडाउन के दौरान असंगठित मजदूरों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में दिक्कत आई थी। रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही मजदूर विभिन्न सरकारों द्वारा चलाई जा रही लाभकारी स्कीमों का फायदा उठा सकते थे। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखा है।












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