Karnataka MDM Egg Row:स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से NEP को सपोर्ट, बच्चों के अंडा और मीट खाने पर कही ये बात
नई दिल्ली, 15 जुलाई। कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को अंडा और मांस देने के विरोध के बीच स्वास्थ्य और कल्याण ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। जिसमें बच्चों को खाने में अंडा और मांस परोसना हानिकारक बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट इसको लेकर कई अहम बाते कहीं हैं।

कर्नाटक में मध्याह्न भोजन योजना में अंडे परोसना शुरुआत से ही विवादों में रहा। कर्नाटक में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को लेकर बनाए गए पैनल के सुझाव में भी इसे एमडीएम से बाहर करने का सुझाव दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य और कल्याण पर कर्नाटक के स्थिति पत्र ने मध्याह्न भोजन में अंडे परोसने को योजना को बल नहीं मिला सका। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अंडे और मांस के सेवन से बच्चों में जीवनशैली संबंधी विकार हो सकते हैं। दरअसल, कर्नाटक में मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडा और मीट परोसा जाने को लेकर काफी दिनों से विवाद चल रहा है। पोषण विशेषज्ञ एक ओर इसे कुपोषण खत्म करने का उपाय बता रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर इसका विरोध किया जा रहा है। यह योजना अब कर्नाटक के केवल सात पिछड़े जिलों तक ही सीमित है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अंडे और मांस के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के माध्यम से प्रदान की जाने वाली कोई भी अतिरिक्त ऊर्जा जीवन शैली संबंधी विकारों की ओर ले जाती है। जीवनशैली संबंधी विकार जैसे मधुमेह, प्रारंभिक मासिक धर्म, भारत में प्राथमिक बांझपन बढ़ रहे हैं, और देशों में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि पशु-आधारित खाद्य पदार्थ मनुष्यों में हार्मोनल कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। जीन-आहार बातचीत से संकेत मिलता है कि भारतीय जातीयता के लिए सबसे अच्छा क्या है, और नस्ल की प्राकृतिक पसंद पर विचार करने की आवश्यकता है।












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