रानी रूपमती जिन्होंने पति को हराने वाले शख़्स से शादी के बजाय ज़हर पीना चुना

यह दृश्य है 16वीं सदी के मालवा का. आज की दिल्ली से लगभग 700 किलोमीटर दक्षिण में यह ऐतिहासिक क्षेत्र मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के संगम पर स्थित है.

लेखिका मालती रामचंद्रन के अनुसार, यहां नर्मदा नदी बलखाती है और संगीत सुनाई देता है. नदी के साथ साथ चलते शिकारी बाज़ बहादुर को एक आवाज़ सुनाई देती है.

चमेली की ख़ुशबू लिए हवा गीत की मधुरता को सुरीले टुकड़ों में पहुंचा रही है. वह आवाज़ का पीछा करते हैं. "चलते-चलते एक बड़े पेड़ के नीचे गाने में मगन एक लड़की को देखते हैं और फिर देखते ही रह जाते हैं. गायिका केंद्रीय राग पर आती हैं तो बाज़ बहादुर उनके साथ गाने में शामिल हो जाते हैं."

बाज़ बहादुर मियां बायज़ीद का शाही नाम था. वह वैसे तो मध्य भारत के मालवा राज के शासक थे लेकिन संगीत में भी पारंगत थे. इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने उन्हें 'अद्वितीय गायक' बताया है.

बाज़ बहादुर ने सौंदर्य और स्वर का ऐसा मिलन देखा तो दीवाने हो गए. मुश्किल से लड़की ने बताया कि उनका नाम रूपमती है.

एक लोक कथा के अनुसार, शादी के प्रस्ताव पर रूपमती ने जवाब दिया- "मैं तुम्हारी दुल्हन तब बनूंगी जब रीवा (नर्मदा) मांडू (शहर) से गुज़रेगी."

बाज़ बहादुर ने नदी में उतर कर उससे एक हज़ार फ़ुट ऊंचे मांडू से गुज़रने की दरख़्वास्त की.

नदी ने उनसे कहा कि वह अपनी राजधानी वापस जाएं और इमली के एक विशेष पवित्र पेड़ की तलाश करें. उसकी जड़ों में पानी का सोता मिलेगा जो रीवा के पानी से जारी होता है.

बाज़ बहादुर ने पेड़ को तलाश किया, उसकी जड़ें खोद कर सोते को ढूंढ निकाला और एक झील को उसके पानी से भर दिया और इस तरह रूपमती की शर्त पूरी कर दी. झील का नाम रीवा कुंड रखा गया.

रानी रूपमती
Getty Images
रानी रूपमती

रानी रूपमती का नर्मदा से प्यार

रामचंद्रन लिखती हैं कि बाज़ बहादुर ने रूपमती से अपने साथ महल जाने को कहा तो वह तभी तैयार हुईं जब सुल्तान से वादा ले लिया कि वह हर दिन नर्मदा नदी को देखेंगी.

वादे के अनुसार, बाद बहादुर ने महल में दो गुंबदों वाला एक पवेलियन बनवाया जहां से रूपमती हर दिन अपनी प्यारी नदी देखतीं. पहली नज़र की मोहब्बत की यह कहानी दूसरी किताबों के अलावा अहमद अल उमरी की 1599 में लिखी गई एक किताब में भी बयान की गई है.

एल एम करम्प ने उस किताब का 1926 में 'द लेडी ऑफ द लोटस: रूपमती, मांडू की मलिका: वफ़ादारी की एक अजीबोग़रीब कहानी' नाम से अनुवाद किया.

मोहम्मद हुसैन आज़ाद 'दरबार-ए-अकबरी' में लिखते हैं कि रूपमती "ऐसी परीज़ाद (परीपुत्री) थीं जिनके रूप का बाज़ बहादुर दीवाना थे. इस सौंदर्य पर सोने पर सुहागा यह कि वह हास्य, हाज़िर जवाबी, शायरी और गाने बजाने में बेजोड़, बल्कि पूनम के चांद जैसी थीं."

करम्प का कहना है कि रूपमती को संगीतकार और कवियत्री के तौर पर याद किया जाता है. भीम कल्याण रागिनी उन्होंने ही सृजित की थी.

अपने शोध 'मुग़लों के मातहत मालवा' में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता सैयद बशीर हसन लिखते हैं, "रूपमती का संबंध रीति काव्य की धारा से था."

अल उमरी की किताब में रूपमती की 26 कविताएं बताई गई हैं. एक कविता कुछ इस तरह है:

मोहब्बत की बुलंदियों पर चढ़ना मुश्किल है

जैसे शाख़ों के बग़ैर खजूरों के गोल दरख़्त पर

ख़ुशक़िस्मत तो फलों तक पहुंच जाते हैं

बेनसीब ज़मीन पर गिर जाते हैं

रानी रूपमती
Getty Images
रानी रूपमती

रूपमती और बाज़ बहादुर के मोहब्बत की कहानी

सन् 1555 में मुस्लिम और हिंदू रस्मों के अनुसार, शादी के बाद ये मोहब्बत करने वाले 6 साल तक ख़ुशियों में खोए रहे.

डॉक्टर तहज़ीब फ़ातिमा का शोध है कि बाज़ बहादुर हर वक़्त रूपमती के साथ रहते. रूपमती को भी बाज़ बहादुर से गहरी और सच्ची मोहब्बत थी.

दोनों एक-दूसरे से क्षण भर के लिए भी जुदा न रह सकते थे. बाज़ बहादुर रूपमती के प्यार में कुछ ऐसे बंध गए कि राजपाट से भी नाता तोड़ लिया.

"शेरशाह सूरी के बेटे सलीम शाह सूरी के एक ताक़तवर अमीर (शासक) दौलत ख़ान ने बाज़ बहादुर पर हमला करना चाहा तो अपनी मां के ज़रिए प्रभावी शासकों के साथ दौलत ख़ान को युद्ध से दूर रखने के लिए उज्जैन, मांडू और कुछ दूसरे क्षेत्र हवाले कर दिए."

"बाद में बाज़ बहादुर ने दौलत ख़ान को किसी बहाने कत्ल करके उनका सिर सारंगपुर शहर के दरवाज़े पर लटका दिया और अपने पुराने इलाक़ों पर दोबारा क़ब्ज़ा कर लिया. फिर रायसेन और भलेर पर भी क़ब्ज़ा करके अपनी सल्तनत को बढ़ाया मगर फिर भोग विलास और संगीत में खो गए."

ऐसी स्थिति में बिखराव शुरू हो गया. राजपाट की देखरेख से उनकी ग़फ़लत ने जागीरदारों और अफ़सरों को जनता पर ज़ुल्म करने का मौक़ा दे दिया और मुग़ल सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर को मालवा की तरफ़ खींच लिया.

मार्च 1561 में अकबर ने माहम अंगा के बेटे अधम ख़ान की कमान में फ़ौज को मालवा की तरफ़ रवाना किया. मुग़ल फ़ौज सारंगपुर पहुंची और बाज़ बहादुर जो सारंगपुर में रहते थे, शहर से तीन कोस दूर निकल गए और अपना पड़ाव डाला.

लेकिन वह अधम ख़ान की बहादुरी का मुक़ाबला न कर सके और हार कर दक्षिण पश्चिम की ओर नदियों नर्मदा और ताप्ती के पार ख़ानदेश की तरफ़ निकल गए. ख़ानदेश अभी के महाराष्ट्र में है.

रानी रूपमती
Getty Images
रानी रूपमती

जब रूपमती ज़हर खाकर सो गईं

मोहम्मद हुसैन आज़ाद लिखते हैं, "बाज़ बहादुर के घर में पुरानी सल्तनत थी और दौलत का अंदाज़ा नहीं. हर तरह के हीरे जवाहरात और तोहफ़ों से मालामाल थे. कई हज़ार हाथी थे."

"अरबी और ईरानी घोड़ों से अस्तबल भरे हुए… बेइंतहा धन दौलत जो हाथ आई तो अधम ख़ान मस्त हो गए. कुछ हाथी एक अर्ज़ी के साथ बादशाह अकबर को भेज दिए और ख़ुद वहीं बैठ गए. जीते गए राज से ख़ुद ही अमीरों (शासकों) में बांट दिए.'

(रूपमती के) सौंदर्य और गुणों की धूम सुनकर अधम ख़ान भी लट्टू हो गए और पैग़ाम भेजा. रूपमती ने जवाब दिया, "जाओ, लुटे पिटे घरवालों को न सताओ. बाज़ बहादुर गया, सब बातें गईं. अब इस काम से दिल टूट गया."

अधम ख़ान ने फिर किसी और को भेजा. दिल ने तो नहीं माना मगर रूपमती समझ गईं कि इस तरह छुटकारा न होगा. दो तीन बार टाल कर मिलन का वादा किया.

जब वह रात आई तो सवेरे सवेरे हंसी ख़ुशी, बन संवर, फूल पहन, इत्र लगा छप्पर खट (सेज) में गईं और पांव फैला कर लेट गईं. अधम ख़ान उधर घड़ियां गिन रहे थे. वादे का वक़्त न पहुंचा था मगर वो जा पहुंचे.

"ख़ुशी ख़ुशी छप्पर खट के अंदर गए कि उन्हें जगाएं. जागे कौन? वह तो ज़हर खाकर सोई थीं."

रूपमती को सारंगपुर में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया. अकबर इन सभी घटनाओं पर अधम ख़ान से नाराज़ थे मगर जब उनके रज़ाई बाप (उस मां के पति जिसने जन्म नहीं दिया मगर जिसका दूध पिया) का क़त्ल किया तो सज़ा के तौर पर उनकी जान ले ली.

तब ही बाज़ बहादुर ने मुग़ल बादशाहत को क़बूल कर लिया और सम्राट अकबर के मातहत सेवाएं देते रहे. बाज़ बहादुर भी बाद में अपनी प्रेमिका के पहलू में दफ़न हुए.


ये भी पढ़ेंः-


(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+