राम मंदिर मुद्दे पर मुस्लिम पक्ष दोहरा रवैया अपना रहा: श्री श्री रविशंकर

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है उसके बाद आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने बोर्ड के फैसले का विरोध किया है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुस्लिम बोर्ड का यह अधिकार है कि वह पुनर्विचार याचिका दायर करें, उनके पास मौका है। लेकिन अब यह मामला सुलझ चुका है ,लिहाजा मैं हर किसी से अपील करूंगा कि वह अपने फैसले पर फिर से विचार करें। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दोनों ही पक्षों ने स्वीकार किया है।

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श्री श्री रविशंकर ने कहा कि मुस्लिम बोर्ड ने दोहरा रवैया अख्तियार किया है। राम मंदिर मुद्दे पर मुस्लिम गुटों ने पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है जोकि दोहरा रवैया है। उन्होंने कहा कि मैं इस मसले पर कुछ भी नहीं कह सकता हूं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व जमियत ने पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है। बोर्ड ने कहा कि 99 फीसदी मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के पक्ष में हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को दावा किया है कि देश के 99 फीसदी मुसलमान चाहते हैं कि अयोध्या एकमत से आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अदालत में रिव्यू पिटीशन दर्ज किया जाय। बता दें कि इससे पहले बोर्ड ने कहा था कि इस मामले में 9 दिसंबर तक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर किया जाएगा। यहां यह बता देना जरूरी है कि खुद पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले में कोई पार्टी नहीं है। बोर्ड के जेनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी के मुताबिक, "मुसलमानों को जुडिशरी पर विश्वास है। इसी वजह से रिव्यू पिटीशन दाखिल किया जा रहा है। हालांकि, अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह भरोसा कमजोर पड़ा है।" रहमानी के मुताबिक, "देश के 99 फीसदी मुसलमान रिव्यू पिटीशन के हक में हैं। अगर यह समझा जा रहा है कि बड़ा तबका इसके खिलाफ है तो यह गलत है।"

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