क्या है Zanskar Ponies की खासियत, जो दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में कर रहे भारतीय सेना की मदद
दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में भारतीय सेना के जवान हर मौसम में तैनात रहते हैं। वहां की ऊंचाई समुद्र तल से 5753 मीटर है, ऐसे में हेलीकॉप्टर्स को भी पहुंचने में दिक्कत होती है। इन खराब हालात के बीच वहां पर जांस्कर पोनी (Zanskar Ponies) काफी मददगार साबित हो रहे।
भारतीय सेना ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें जांस्कर घोड़े भारी-भरकम सामान ले जाते नजर आ रहे। उन्होंने रास्ते में रुककर ओपी बाबा का आशीर्वाद भी लिया। ओपी बाबा भारतीय सेना के जवान थे, जो सियाचिन में शहीद हुए। कहा जाता है कि उनकी आत्मा आज भी देश की सीमा की रक्षा कर रही। आइए जानते हैं इन घोड़ों की खासियत-

जांस्करी उत्तरी भारत में लद्दाख के छोटे पहाड़ी घोड़े की एक नस्ल है। इसका नाम जांस्कर घाटी के नाम पर रखा गया है। ये हिमाचल प्रदेश की स्पीति नस्ल के समान हैं। आम घोड़े जहां ऊंचाई वाले इलाकों में सही से नहीं चल पाते, लेकिन ये वहां पर शानदार प्रदर्शन करते हैं।
जीव विशेषज्ञों के मुताबिक समुद्र तल से 3000-5000 मीटर ऊंचाई वाले इलाकों में ये घोड़े रहते हैं। वहां पर ये माल धुलाई के काम में आते हैं। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान और भारी बर्फबारी को भी इनका शरीर आसानी से बर्दास्त कर लेता है।
इन छोटे घोड़ों का जीवन करीब 25 साल का होता है। ये आसानी से 50-60 किलो वजन का सामान उठा लेते हैं। पहले इनकी संख्या 20 हजार के आसपास थी, लेकिन फिर ये विलुप्त होना शुरू हो गए। भारतीय सेना सरकार के साथ मिलकर इनके संरक्षण पर भी काम कर रही है।
पर्यावरण को भी नहीं होता नुकसान
वैसे ज्यातार वाहन, हेलीकॉप्टर आदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, ऐसे में जांस्करी लॉजिस्टिक के लिए सबसे बेहतरीन साधन हैं। उनको चलाने के लिए भारतीय सेना अपने जवानों को ट्रेनिंग भी देती है। साथ ही वो बीमार ना पड़ें, ऐसे में समय-समय पर उनकी चिकित्सा जांच भी की जाती है।
हेलीकॉप्टर को क्यों होती है दिक्कत?
जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर जाते हैं, हवा कम होती जाती है। हेलीकॉप्टर को उड़ान के लिए अच्छी खासी हवा चाहिए। ऐसे में उनको दिक्कत होती है। इसके अलावा कई बार हफ्तों तक मौसम खराब रहता है, जिस वजह से ऊंचाई वाले इलाकों में सामान नहीं पहुंच पाता है।












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