Diwali Special: मुगल काल में मनाई जाती थी शाही दिवाली, जानिए किसने और कहां से की थी शुरुआत
Mughals Shahi Diwali: देशभर में दीपों के त्योहार की धूमधाम से तैयारी चल रही है। दीपोत्सव का जश्न मुग़लकाल में भी मनाया जाता था। आइए आपको बताते हैं कि किस मुगल शासक ने शाही दिवाली मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी और पहली बार शाही दिवाली कहां मनाई गई थी।
शाही दिवाली मनाने की शुरुआत मुग़ल शासक सम्राट अकबर ने आगरा से शुरुआत की थी। उनके द्वारा शुरू की गई परंपरा को उनके उत्तराधिकारियों ने बख़ूबी जारी रखा। आज की तारीख़ में भी विभिन्न धर्मों के लोग उत्साह के साथ दिवाली का जश्न मनानते हैं।

दिवाली के आते ही मुगलकालीन यादें भी ताज़ा होने लगती हैं, उस दौर (मुग़ल काल) में लोगों को एकजुट करने के लिए भी बड़े धूमधाम से रोशनी त्योहार सभी धर्मों के लोग मनाते थे। ग़ौरतलब है कि शाही दिवाली मनाने के लिए लाल किला के रंग महल जश्न-ए-चिराग़ां (रोशनी के त्योहार) के लिए एक जगह फिक्स ही कर दिया गया था।
मुग़ल शासक ख़ुद ही रंगों के त्योहार की तैयारी करवाने में जुटे रहते थे। पर्व आने के महीने भर पहले से ही जश्न की तैयारी शुरू कर दी जाती थी। लाल किला परिसर के आसपास की जगहों पर आतिशबाजी का प्रोग्राम रखा जाता था। इसके साथ ही महल में लगे दीये, झूमर, चिरागदानी (लाइट स्टैंड) और फानूस (कुर्सी वाले झूमर) को रोशन किया जाता था।
लखनऊ, मथुरा, आगरा, भोपाल और लखनऊ से बेहतरीन हलवाइयों को बुलाकार शाही पकवान बनवाए जाते थे। इतिहासकारों की मानें मुगल सम्राट अकबर द्वारा आगरा से शुरू की गई शाही दिवाली की परंपरा को उनके उत्तराधिकारियों ने 1857 तक जारी रखा था। मुगल साम्राज्य पर अंग्रेजों द्वारा कब्जा करने तक जारी रखा था।
शाहजहां ने मुगल की राजधानी को दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद लाल किले के अंदर आगरा के जैसे ही दीपोत्सव मनाने की परंपरा को जारी रखा। उन्होंने 'आकाश दीया' की शुरुआत करते हुए दिल्ली की शाही दिवाली चार चांद लगा दिया। इसके मद्देनज़र 40 गज ऊंचे खंभे पर विशाल दीपक (आकाश दीया) किले में स्थापित किया गया। इसे दिवाली के मौक़े पर जलाया जाता था।












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