Sonali Ghosh कौन हैं? जो बनेंगी 118 साल पुराने काजीरंगा नेशनल पार्क की पहली महिला प्रमुख
विश्व प्रसिद्ध काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व को अगले महीने पहली महिला फील्ड डायरेक्टर मिलने वाली हैं। यह जिम्मेदारी असम में चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर तैनात डॉक्टर सोनाली घोष को दी जा रही है, जो एक सितंबर से अपना कार्यभार संभालेंगी।
असम सरकार ने उनकी तैनाती के संबंध में पहले ही आदेश जारी कर दिए हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडों के लिए विश्व विख्यात है। यह असम के नगांव, गोलाघाट,कार्बी आंगलोंग, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों तक फैले हुए वन क्षेत्र में स्थित है।

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट हैं सोनाली घोष
भारतीय वन सेवा (आईएफएस) की अधिकारी डॉक्टर सोनाली घोष मौजूदा फील्ड डायरेक्टर जतिंद्र सरमा से पदभार लेंगी, जो 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। सोनाली घोष अभी गुवाहाटी में असम के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और राज्य में फॉरेस्ट फोर्स के प्रमुख के कार्यालय में रिसर्च एजुकेशन और वर्किंग प्लान डिविजन में चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर तैनात हैं।
118 साल पुराने नेशनल पार्क की पहल महिला चीफ बनेंगी
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वह पहली महिला हैं, जो 118 साल पुराने काजीरंगा नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर का पद संभालने जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'सैन्य कर्मी के परिवार में पैदा हुईं घोष बचपन से ही वन और वन्यजीव संरक्षण में शामिल होना चाहती थीं।'
अपने बैच की आईएफएस टॉपर हैं
उस अधिकारी ने बताया कि घोष 2000-2003 बैच की आईएफएस टॉपर हैं और उनके पास इस क्षेत्र में अनेक डिग्रियां हैं। उन्होंने फॉरेस्ट्री एंड वाइल्डलाइफ साइंस में पीजी किया है, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया से एनवॉयर्मेंटल लॉ में पीजी डिप्लोमा भी कर रखा है और दूसरा सिस्टम मैनेजमेंट में किया है।
काजीरंगा का नाम भी एक महिला शासक से जुड़ा है
उन्होंने कहा, 'उन्होंने भारत-भूटान मानस लैंडस्केप में बाघों के लिए आवास उपयुक्तता से संबंधित रिमोट-सेंसिंग टेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की है।' गौरतलब है कि काजीरंगा का नाम कार्बी से लिया गया है, जो उस महिला शासक के नाम पर है, जिसने प्राचीन काल में इस इलाके पर शासन किया था।
काजीरंगा नेशनल पार्क देश के पूर्वी क्षेत्र में ऐसी जगह पर है, जो मानवीय गतिविधियों से संरक्षित है। काजीरंगा अपने विशाल जंगली क्षेत्र, ऊंची हाथी घास, ऊबड़-खाबड़ और दलदली क्षेत्र और उथले जल क्षेत्रों के लिए चर्चित है।
एक सींग वाले गैंडों के लिए विश्व प्रसिद्ध
यहां विश्व में सबसे अधिक एक सींग वाले गैंडों के साथ-साथ बाघ, हाथी, पैंथर, भालू और कई अन्य स्तनधारियों के साथ हजारों पक्षियों का बसेरा है। काजीरंगा को सबसे पहले 1905 में रिजर्व फॉरेस्ट प्रस्तावित किया गया। 1908 में इसे रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया और 1916 में इसे खेल अभयारण्य घोषित किया गया ।
यूनेस्क ने वर्ल्ड हेरिटेड साइट घोषित किया है
सैलानियों के लिए इसे 1938 में खोला गया और आगे चलकर 1950 में इसे वन्यजीव अभयारण्य बना दिया गया। फरवरी, 1974 में यह नेशनल पार्क बन गया। दिसंबर, 1985 में इसे यूनेस्क ने वर्ल्ड हेरिटेड साइट घोषित किया। (इनपुट-पीटीआई, आईएफएस सोनाली घोष की तस्वीर सौजन्य: सोशल मीडिया)












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