Solar Eclipse 2020: जानिए आपके शहर में कितने बजे दिखेगा सूर्य ग्रहण?

नई दिल्ली। आज साल का पहला सूर्य ग्रहण है, ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले यानी 20 जून को रात करीब 9 बजकर 25 मिनट से लग चुका है, ग्रहण के दौरान कुछ देर के लिए हल्का अंधेरा सा छा जाएगा ।ग्रहण का आंशिक रूप सुबह 9.16 बजे शुरू होगा, जबकि वलयाकार (रिंग की तरह) रूप सुबह 10.19 बजे शुरू होगा और ये दोपहर 2.02 बजे खत्म होगा, वहीं ग्रहण का आंशिक रूप दोपहर 3.04 बजे समाप्त होगा।

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    कहां कब दिखेगा ग्रहण

    कहां कब दिखेगा ग्रहण

    • रायपुर- 10:24-13:58
    • मुंबई- 10:00-13:47
    • जयपुर- 10:14-13:44
    • लखनऊ- 10:26-14:47
    • पटना- 10:14-13:44
    • रायपुर- 10:24-12:10
    • चडीगढ़- 10:22-13:47
    • शिमला- 10:23-13:48
    • रांची- 10:36-14:09
    • भोपाल- 10:14-13:47
    कहां-कहां दिखेगा ग्रहण

    कहां-कहां दिखेगा ग्रहण

    इंडिया के अलावा इस ग्रहण का नजारा नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कोंगों में दिखेगा, तो वहीं भारत में देहरादून, सिरसा अथवा टिहरी कुछ प्रसिद्ध शहर है जहां पर लोग वलयाकार सूर्य ग्रहण का खूबसूरत नजारा देख पाएंगे। देश के अन्य हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

    क्या होता है सूर्य ग्रहण

    क्या होता है सूर्य ग्रहण

    भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी की। कभी-कभी चांद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर अंधेरा फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

    क्या है मान्यताएं?

    क्या है मान्यताएं?

    हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण लगने के समय भोजन के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। खाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं इसलिए ऋषियों ने पात्रों के कुश डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके, ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुल कर बह जाएं।

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