कोरोना वायरस से बचाएगा IIT-BHU का ये छाता, जानिए खासियतें और काम का तरीका

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ जारी इस जंग को जीतने के लिए देशभर से लोग आगे आ रहे हैं। वैश्विक महामारी से मुकाबले के लिए आईआईटी-बीएचयू (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) ने भी कई पहल की है जिसमें से एक है उनके द्वारा बनाया गया 'सोशल रिम छाता', जो कोरोना वायरस लड़ाई में मददगार साबित हो सकता है। दरअसल, आईआईटी बीएचयू का दावा है कि उसके छात्रों और प्रोफेसरों ने मिलकर एक ऐसे छाते का निर्माण किया है जो सोशल डिस्टैंसिंग का सही तरीके से पालन करने में काफी मददगार है।

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    कोरोना से बचाएगा आईआईटी बीएचयू का ये छाता

    कोरोना से बचाएगा आईआईटी बीएचयू का ये छाता

    गौरतलब है कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। कोरोना वायरस से लड़ाई जीतने का एक मात्र तरीका है सामाजिक दूरी, जिसके पालन के लिए सरकार ने कई शख्त कदम भी उठाए हैं। इस दिशा में अब सरकार की मदद के लिए आईआईटी बीएचयू आगे आया है। संस्थान का दावा का है कि उसके बनाए छाते से लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने में मदद मिलेगी।

    'सोशल रिम छाता' वर्तमान समय की मांग

    'सोशल रिम छाता' वर्तमान समय की मांग

    आईआईटी बीएचयू के मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र के प्रोफेसर पीके मिश्रा ने बताया कि 'सोशल रिम छाता' वर्तमान समय में कोरोना वायरस के हराने के लिए जरूरी है। सामाजिक दूरी कैसे मैंटेन की जाए उसका यह एक नायाब उदाहरण हैं। पीके मिश्रा ने बताया कि सोशल रिम छाते को मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र के इन्क्यूबेट टेक मशीनरी एंड मोर प्राइवेट लिमटेड के निशांत कृष्णा और गौरव केडिया ने बनाया है।

    कैसा है छाते का डिजाइन

    कैसा है छाते का डिजाइन

    पीके मिश्रा ने बताया कि छाते को इन्क्यूबेट कंपनी ने तैयार किया है और इसका रोडियस तीन फीट है। रेडियस की वजह से यह छाता लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के बनाए रखने में मदद करता है। इसे डिस्‍क आकार का रूप दिया गया है, ताकि कम से कम तीन फीट की दूरी बनी रहे। सोशल रिम छाते को हाथ से पकड़ने की जरूरत नहीं है इसे, कंधे के ऊपर आराम से रखा जा सकता है।

    पूरे शरीर को सेनिटाइज करने की मशीन भी बनाई

    पूरे शरीर को सेनिटाइज करने की मशीन भी बनाई

    पीके मिश्रा ने कहा, अगर दो लोग इस छाते को लगाकर आमने सामने खड़े होते हैं तो उनके बीच में 6 फीट की दूरी होती है, जो कोरोना वायरस से बचने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा, महामारी से प्राथमिक बचाव के लिए दो चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पहला, सेनिटाइजेशन और दूसरा सोशल डिस्टैंसिंग। आईआईटी, बीएचयू स्थित मालवीय उद्यमिता संवर्धन एवं नवप्रवर्तन केंद्र के इन्क्यूबेटर जीतू शुक्ला ने पूरे शरीर को सेनिटाइज करने के लिए एक उदाहरण पेश किया है जो कोरोना वायरस को फैलने से रोक सकता है।

    सेनिटाइजर मशीन ऐसे करती है काम

    सेनिटाइजर मशीन ऐसे करती है काम

    पूरे शरीर को सेनिटाइज करने वाली मशीन को कहीं भी लगाया जा सकता है, यह स्वचालित है इसलिए इसमें ज्यादा खर्चा भी नहीं है। जैसे ही इस उपकरण के सामने कोई व्यक्ति खड़ा होता है तो इसमें लगा सेंसर एक्टवेट हो जाता है। उसके बाद उपकरण व्यक्ति को सेनिटाइज करने के लिए 10-15 मिलीलीटर सेनिटाइजर का स्प्रे 15 सेकंड तक करेगा, जिससे व्यक्ति का पूरा शरीर, कपड़े, जूते सभी सेनिटाइज हो जाएंगे।

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