सोशल: 'ईवीएम नहीं चुनाव आयोग ही हैक हो गया'

गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे दौर का मतदान पूरा हो गया है. इसी के साथ चुनावी पार्टियों की किस्मत भी ईवीएम मशीनों में कैद हो गई.

चुनावी दंगल के बीच एक संस्था जो सबसे ज़्यादा चर्चा में रही वह है चुनाव आयोग. विशेषकर गुजरात चुनाव के दूसरे दौर के मतदान के दौरान.

सबसे पहले बहस छिड़ी बुधवार को जब चुनाव आयोग ने कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी को एक नोटिस जारी किया वोटिंग से एक दिन पहले कुछ टीवी चैनलों पर राहुल गांधी का इंटरव्यू प्रसारित किया जा रहा था.

चुनाव आयोग ने इस इंटरव्यू को आचार संहिता का उल्लंघन करार देते हुए इस पर रोक लगा दी, साथ ही राहुल गांधी पर कार्यवाही क्यों न की जाए संबंधी नोटिस भी जारी किया.

राहुल गांधी
Reuters
राहुल गांधी

इसके बाद यह बहस और आगे बढ़ी गुरुवार को मतदान के दिन, अहमदाबाद के एक बूथ पर वोट देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस काफ़िले के साथ रवाना हुए उस पर विवाद हो गया.

कांग्रेस ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया तो वहीं चुनाव आयोग ने पहले कहा कि वह इसकी जांच करेगा लेकिन बाद में उसने इस काफिले को आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में नहीं माना.

राहुल गांधी का टीवी इंटरव्यू चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन

क्या वोट देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोड़ी आचार संहिता?

इन घटनाओं के बाद कई लोग चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता और निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगे. सोशल मीडिया पर हैशटेग RIPElectionCommission ट्रेंड करने लगा.

ज़ुनैद रहमान ने एक कार्टून शेयर करते हुए लिखा, ''चुनाव आयोग केंद्र सरकार के हाथों की कठपुतली बन गया है.''

पॉली सरकार ने ट्वीट किया, ''ईवीएम हैक नहीं हो रही थी...इलैक्शन कमिश्न हैक हो गया.''

आरती ने ट्वीट किया, ''विकास यह है- इलैक्शन कमिश्न ऑफ इंडिया से इलैक्शन कमिश्न ऑफ मोदी बन जाना''

अच्छे दिन नामक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, ''गुजरात चुनाव के नतीजे भले ही कुछ भी निकलें, लेकिन सबसे बड़ी हार चुनाव आयोग की हुई है, पहले चुनाव की तारीखों में देरी की, फिर मोदी की रैलियां, सी-प्लेन और फिर कांग्रेस को नोटिस.

अतुल गायकवाड़ ने भारतीय निर्वाचन आयोग के सिंबल पर इलैक्शन कमिशन ऑफ मोदी लिखी तस्वीर शेयर की है और ट्वीट किया है, ''कृप्या इलैक्शन कमिश्न ऑफ इंडिया का नाम बदलकर इलैक्शन कमिश्न ऑफ मोदी रख लीजिए.''

हालांकि इस बीच कुछ लोग चुनाव आयोग के समर्थन में भी ट्वीट करते दिखे. ट्विटर पर हैशटेग ECI भी चल रहा है.

सिद्धांत त्रिपाठी ने ट्वीट किया, ''ईसीआई मरा नहीं है, जाने क्यों कुछ बेवकूफ़ लोग आरआईपी लिख रहे हैं, चुनाव के बाद इस तरह की प्रतिक्रिया बेहद अप्रासांगिक और बेबुनियाद है.''

बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने साल 2009 का एक लेख शेयर किया है जिसमें उस समय के इलैक्शन कमिश्नर नवीन चावला के कांग्रेस के साथ करीबी रिश्ते होने की बातें बताई गई थीं.

जीवीएल ने ट्वीट किया, ''कांग्रेस को ऐसे ही इलैक्शन कमिश्नर पसंद हैं क्या? राहुल जी पिछले 10 साल में आपने और आपकी मां ने पूरे पीएम दफ्तर को ही कठपुतली बना दिया था? तमाशा करना आपका काम है. हार को स्वीकार करने के लिए कुछ बेहतर बहाने खोजिए.''

प्रविंदा साहू ने कांग्रेस नेता रणदीप सूरजेवाला के दो ट्वीट को एक साथ दिखाते हुए ट्वीट किया, '' पहली तस्वीरः गुजरात चुनाव के दूसरे दौरे के चुनाव के बाद रणदीप सूरजेवाला के ईसीआई के बारे में विचार, दूसरी तस्वीरः अहमद पटेल के गुजरात से राज्यसभा सीट जीतने के बाद सूरजेवाला के ईसीआई के बारे में विचार.''

इटैलियन बहू नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, ''जब कांग्रेस जीते तो ईसी स्वतंत्र और निष्पक्ष, अगर हारे तो ईसी भ्रष्ट हो जाती है. जीते तो ईवीएम ठीक, हारे तो ईवीएम ख़राब.''

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