जिस पुजारी को सौंपी मंदिर की गुप्त तिजोरी, उसी ने गिरवी रख दिए 12 करोड़ के गहने, अब पड़े लेने के देने
Singapore temple jewellery news: कंदासामी सेनापति को सिंगापुर के एक प्रसिद्ध मंदिर का पुजारी नियुक्त किया गया था और साथ ही गर्भ गृह में रखी तिजोरी की चाबी भी सौंपी गई थी।

Indian priest in singapore: सिंगापुर से एक बेहद शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। यहां भारतीय मूल के एक पुजारी को सिंगापुर के प्रसिद्ध हिंदू मंदिर के करीब 12 करोड़ रुपए के गहनों का गबन करने के मामले में 6 साल की सजा सुनाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुजारी का नाम कंदासामी सेनापति है और ये मंदिर के गर्भ गृह में रखे पूरे 2 मिलियन सिंगापुर डॉलर (करीब 12 करोड़ रुपए) के सोने के गहनों का मामला है।
चैनल न्यूज एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कंदासामी सेनापति को हिंदू एंडोमेंट्स बोर्ड ने दिसंबर 2013 में सिंगापुर के प्रसिद्ध श्री मरिअम्मन मंदिर का मुख्य पुजारी नियुक्त किया था। इसके बाद 30 मार्च 2020 को जब कंदासामी गबन के मामले में फंसा तो उसने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कंदासामी को गहनों का गबन करके विश्वासघात करने का दोषी पाया गया। इसके अलावा देश के बाहर रकम भेजने के दो और मामलों में भी कंदासामी को दोषी ठहराया गया।
तिजोरी में रखे थे 255 सोने के गहने
कंदासामी सेनापति पर कानून का शिकंजा उस वक्त कसा, जब कोरोना वायरस महामारी के दौरान मंदिर के हिसाब-किताब में गड़बड़ी मिली और गहने गायब होने का भी पता चला। कंदासामी को साल 2014 में मंदिर के पवित्र गर्भगृह में रखी तिजोरी की चाबियां और सेफ खोलने वाले कोड सौंपे गए थे। उस समय इस तिजोरी में करीब 1.1 मिलियन सिंगापुर डॉलर की कीमत के 255 सोने के गहने रखे हुए थे, जिनपर केवल मंदिर का अधिकार था।
श्री मरिअम्मन मंदिर के पुजारी कंदासामी पर जो आरोप लगाए गए, उनमें बताया गया कि साल 2016 में उसने मंदिर के गहनों को एक-एक करके गिरवी रखना शुरू किया। वो दुकान पर जाकर गहने गिरवी रखता और उनके बदले में मिली रकम जब खत्म हो जाती, तो फिर दूसरे गहने गिरवी रखकर पुराने गहनों को छुड़ाता।
4 साल तक चलता रहा गहने गिरवी रखने का खेल
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंदासामी ने साल 2016 में मंदिर की तिजोरी में रखे 66 सोने के गहने गिरवी रखे। वो एक गहना गिरवी रखता, और फिर उसकी रकम चुकाने के लिए दूसरा गहन गिरवी रखता, इस तरह एक साल के भीतर उसने ऐसा 172 बार किया। इसके बाद कंदासामी रुका नहीं और उसने 2016 से लेकर 2020 तक ऐसा किया।
मंदिर समिति को कैसे चकमा देता था कंदासामी
कंदासामी गहने गिरवी रखता और जैसे ही मंदिर समिति को हिसाब-किताब दिखाने की तारीख नजदीक आती, वो किसी तरह उधार के जरिए रुपयों का इंतजाम कर गहनों को छुड़ा लाता और फिर से तिजोरी में रख देता। इसके बाद इधर हिसाब-किताब पूरा हुआ और उधर कंदासामी फिर से गहनों को गिरवी रख, उधार ली गई रकम चुका देता।
गहनों से जुटाए 23 लाख सिंगापुर डॉलर
साल 2016 से 2020 के दौरान, यानी चार साल में कंदासामी ने मंदिर के गहनों को गिरवी रखकर करीब 23 लाख सिंगापुर डॉलर हासिल किए। इनमें से एक लाख 41 हजार सिंगापुर डॉलर की रकम उसने भारत भेजी और बाकी के अपने बैंक खाते में जमा किए। मार्च 2020 में जब कोरोना वायरस ने सिंगापुर में जमकर कहर बरपाया तो संक्रमण रोकने के लिए देश में सर्किट ब्रेकर लगाया गया और मंदिर के हिसाब-किताब की तारीख भी आगे बढ़ गई।
कैसे खुली कंदासामी की पोल
जून 2020 में जब कोरोना वायरस का प्रकोप थमा, तो मंदिर की फाइनेंस टीम ने कंदासामी से हिसाब-किताब मांगा, जिसपर उसने गोल-मोल जवाब देते हुए कहा कि जब वो अपने परिवार से मिलने भारत गया था, तो तिजोरी की चाबी गलती से वो वहीं भूल आया। फाइनेंस टीम को कंदासामी पर शक हुआ और जब उन्होंने दबाव डाला तो उसने कबूल कर लिया कि मंदिर के गहनों को उसने गिरवी रखा है।
मंदिर में वापस लाए गए सभी गहने
इसके बाद मंदिर समिति की शिकायत पर कंदासामी सेनापति के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराया गया और सभी गहनों को छुड़ाकर वापस मंदिर के गर्भगृह में रखा गया। इस घटना के बाद कंदासामी ने अपने पद से इस्तीफा दिया और कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए 6 साल की सजा सुनाई। वहीं, मंदिर समिति के वकील ने कोर्ट में कहा कि जिन गहनों को कंदासामी ने गिरवी रखा, उनकी कीमत काफी ज्यादा थी, इसलिए उसे सात साल की सजा और सुनाई जाए।
दोस्त की मदद करनी थी, इसलिए गिरवी रखे गहने: कंदासामी
वहीं, अपने बचाव में कंदासामी ने कोर्ट में दलील दी, कि उसने ये गहने इसलिए गिरवी रखे, क्योंकि वो कैंसर से जूझ रहे अपने एक दोस्त की मदद करना चाहता था। इसके अलावा उसने कोर्ट में यह भी कहा कि वो भारत में मंदिर और स्कूलों को आर्थिक सहायता देने वाला था, इसलिए उसने ये गहने गिरवी रखे। इस घटना के बाद हिंदू एंडोमेंट्स बोर्ड ने चार और मंदिरों में तुरंत हिसाब-किताब करने के आदेश दिए हैं।












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