पाक का झंडा फहराने वाले गिलानी को क्यों मिले भारतीय पासपोर्ट
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी घोर भारत विरोधी है। वे पाकिस्तान परस्त हैं। वे इस बात को फख्र के साथ कहते-बताते हैं। पर अब वे भारत का पासपोर्ट चाहते हैं। उन्हें अपनी बेटी के पास खाड़ी के देश में जाना है। बेटी बीमार बताई जाती है।

सवाल ये है कि पाकिस्तान का झंडा फहराने वाला इंसान अब अपने पाकिस्तानी रहनुमाओं से पासपोर्ट क्यों नहीं लेता। क्या उसे भारत का पासपोर्ट लेते हुए शर्म नहीं आ रही ? कायदे से मोदी सरकार को उनसे पासपोर्ट देने के बदले में कहना चाहिए कि वे आगे से देश विरोधी हरकतों से बाज आएंगे। ये मौका है कि सरकार गिलानी को कस दे। गिलानी के पासपोर्ट के सवाल पर राज्य की गठबंधन सरकार में पीडीपी और भाजपा के नेताओं में अलग-अलग राय सामने आ रही है।
मिले या नहीं मिले पासपोर्ट
पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती चाहती हैं कि गिलानी को पासपोर्ट दे दिया जाए। उधर बीजेपी गिलानी से उनके देश विरोधी कृत्यों के लिए माफी मांगने के लिए कह रही है। ये तो सियासत है। सियासत में अलग-अलग बातें-बयान आते रहेंगे। पर बड़ा सवाल ये है कि आखिर गिलानी जब भारत से इतना नाराज रहते हैं तो उन्हें यहां का पासपोर्ट लेने की क्यों जरूरत पड़ी। कायदे से तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। वहां से उन्हें पाकिस्तान का पोसपोर्ट लेकर जहां भी चाहें चले जाना चाहिए।
मिलते पाक के उच्चायुक्त से
गिलानी उन लोगों में हैं जो लगातार दिल्ली में आकर पाकिस्तान के उच्चायुक्त से मुलाकत करते हैं। वे बार-बार कहते हैं कि कश्मीर भारत का अंग नहीं है। हालांकि ये तय है कि आने वाले समय में गिलानी को भारत सरकार पासपोर्ट दे देगी। पर कायदे से तो उन्हंय जेल में बंद करके रखा जाना चाहिए देश विद्रोही हरकतों के लिए। वरिष्ठ चिंतक पवन धीर मानते हैं कि भारत सरकार को गिलानी सरीखे लोगोंसे सख्ती से पेश आना चाहिए ताकि देश विरोधियों को एक मैसेज मिल जाए।












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