सेंट्रल विस्टा को लेकर शिवसेना का हमला, कहा- कोरोना संकट में देश बेहाल, लेकिन केंद्र प्रोजेक्ट नहीं रोक रहा
मुंबई, मई 8। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच देश की नई संसद और एक नए आवासीय परिसर के निर्माण को लेकर देश की सियासत में घमासान मचा हुआ है। तमाम राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से सेंट्रल विस्टा परियोजना को रद्द करने की मांग की है। इतना ही नहीं इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल कर दी गई है। इस बीच महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना ने भी सेंट्रल विस्ट प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
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कोरोना संकट में रूकना चाहिए सेंट्रल विस्ट प्रोजेक्ट- शिवसेना
शिवसेना का कहना है कि जब देश में महामारी का दौर चल रहा है तो ऐसे समय में इतने महंगे प्रोजेक्ट का काम जारी रखने के क्या मतलब है? शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि कोरोना संकट के इस दौर में पड़ोसी देश भारत को मदद की पेशकश कर रहे हैं और मोदी सरकार है कि कई करोड़ों रुपए की लागत वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के काम को रोकने के लिए तैयार नहीं है।
कई पड़ोंसी देशों ने पहुंचाई है मदद
शिवसेना ने आगे कहा है कि कोरोना महामारी के इस संकट में अधिकतर देशों ने भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। बांग्लादेश ने रेमडेसिविर की 10,000 शीशियां भेजी हैं, जबकि भूटान ने ऑक्सीजन की सप्लाई की है। वहीं नेपाल, म्यांमार और श्रीलंका ने भी मदद की पेशकश की है, लेकिन ऐसे समय में जब देश महामारी के दौर से गुजर रहा है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20,000 करोड़ रुपये की महत्त्वकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकने के लिए तैयार नहीं है।
नेहरू-गांधी की बनाई व्यवस्था के भरोसे है देश- शिवसेना
शिवसेना ने कहा कि आज देश नेहरू-गांधी द्वारा बनाई गई व्यवस्था के सहारे है। कई गरीब देश भारत को मदद की पेशकश कर रहे हैं। इससे पहले, पाकिस्तान, रवांडा और कॉन्गो जैसे देश दूसरों से मदद लेते थे, लेकिन आज के शासकों की गलत नीतियों के चलते, भारत आज इस स्थिति से गुजर रहा है।












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