'सेना' पति कौन? SC में उद्धव का असली का दावा, एकनाथ शिंदे गुट ने कही ये बात
नई दिल्ली, 3 अगस्त। शिवसेना में बगावत के बाद अब 'असली' शिवसेना को लेकर उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के दावों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। बुधवार को सुनवाई में उद्धव ठाकरे की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। इस दौरान सिब्बल ने अदालत से कहा कि शिंदे गुट मूल पार्टी पर दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने सुनवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी है।

सिब्बल ने एकनाथ शिंदे गुट को लेकर कहा आप ये दावा नहीं कर सकते हैं कि आप राजनीतिक दल हैं। राजनीतिक दल का फैसला निर्वाचन आयोग करता है। आप गुवाहाटी में बैठकर राजनीतिक पार्टी का निर्णय नहीं ले सकते। सिब्बल ने कहा कि मूल पार्टी उद्धव ठाकरे के साथ है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी भी उद्धव ठाकरे की तरफ से पेश हुए। उन्होंने कहा एकनाथ शिंदे गुट के लिए सिर्फ एक ही बचाव बचता है कि वह बीजेपी के साथ विलय कर लें लेकिन उन्होंने ऐसा कोई दावा नहीं किया है।
शिवसेना के असली मालिक के दावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यी पीठ ने दोनों गुटों की याचिका पर सुनवाई की।
शिंदे गुट का पार्टी में टूट से इनकार
वहीं एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से हरीश साल्वे कोर्ट में पेश हुए। साल्वे ने अदालत में शिंदे गुट द्वारा सत्ता पर कब्जा करने को सही बताते हुए कहा "भारत में हम राजनीतिक दल को कुछ नेताओं से जोड़कर देखते हैं। मैं (शिंदे गुट) शिवसेना से संबद्ध हूं। मेरे मुख्यमंत्री ने मुझसे मिलने से इनकार कर दिया। मैं सीएम बदलना चाहता हूं। यह पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं है यह पार्टी का आंतरिक मामला है।"
उन्होंने आगे कहा "अगर बड़ी संख्या में विधायक हैं जो मुख्यमंत्री के काम करने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं और परिवर्तन चाहते हैं तो वे क्यों नहीं कह सकते कि नए नेतृत्व का चुनाव होना चाहिए?"
साल्वे ने तर्क दिया कि एकनाथ शिंदे के समर्थकों ने पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी है और किसी बैठक में शामिल नहीं होने को सदस्यता छोड़ने से जोड़कर नहीं आंका जा सकता है।
शिंदे गुट की तरफ से वकील महेश जेठमलानी ने कहा नई सरकार इसलिए नहीं आई क्योंकि मुख्यमंत्री (उद्धव) फ्लोर टेस्ट में हार गए थे - यह इसलिए था क्योंकि उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा "अगर कोई मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट लेने से इनकार करता है, तो यह माना जाना चाहिए कि उसके पास बहुमत नहीं है।"












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