उद्धव गुट को सुप्रीम कोर्ट से फिर झटका, फ्लोर टेस्ट के खिलाफ याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार
नई दिल्ली, 1 जुलाई: महाराष्ट्र में गुरुवार को बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ, जहां बीजेपी का समर्थन मिलने के बाद एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद शाम को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं अब शिंदे सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करने की तैयारी कर रही है, जिसके खिलाफ शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
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दरअसल शिवसेना के चीफ व्हिप सुनील प्रभु की ओर से एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट इन 16 बागी विधायकों को सस्पेंड करे, जिनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की गई है। इसके अलावा जब तक अयोग्यता पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक बहुमत परीक्षण ना किया जाए। प्रभु ने कहा कि कोर्ट ने पिछले आदेश में 12 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा था, लेकिन नई सरकार ने शपथ भी ले ली। इस पर कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि वो इस पर 11 जुलाई को ही सुनवाई करेंगे।
वहीं डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने 16 बागी विधायकों को अयोग्यता का नोटिस दे रखा है। जिस पर शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायकों ने खुद डिप्टी स्पीकर को हटाने का नोटिस दिया है, ऐसे में वो किसी की योग्यता का फैसला कैसे कर सकते हैं? हालांकि इस मुद्दे पर कोर्ट ने पहले ही डिप्टी स्पीकर को नोटिस देकर जवाब मांग लिया था।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया
वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जो 2 और 3 जुलाई को होगा। नाना पटोले ने स्पीकर पद से इस्तीफा दे दिया था, जिस वजह से सबसे पहले स्पीकर का चुनाव किया जाएगा। इसके बाद 3 जुलाई को विधानसभा में बहुमत परीक्षण हो सकता है।












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