Watch Video:शत्रुजीत ब्रिगेड ने पूर्वी लद्दाख में आसमान से दिखाया दम, चीन की नाक के नीचे सबसे बड़ा युद्धाभ्यास
लेह, 2 नवंबर: भारतीय सेना पिछले साल पूर्वी लद्दाख में चीन की हरकतों के बाद उस इलाके में इस समय संभवत: सबसे बड़ा युद्धाभ्यास कर रही है। इस युद्धाभ्यास की खासियत यह है कि इसमें सेना, वायु सेना और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की बहुत अच्छी जुगलबंदी की गई है। मकसद साफ है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन को पिछले साल जैसी किसी भी चालबाजी का फौरन और मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। इसके लिए 14,000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर शत्रुजीत ब्रिगेड के चुनिंदा पैराट्रूपर्स को हवाई जहाज से ड्रॉप किया जा रहा है। इसके साथ ही सैन्य उपकरण और विशेष सैन्य वाहन भी उसी तरीक से ड्रॉप किए जा रहे हैं। भारतीय सेना की ओर से यह वीडियो जारी किया गया है, जिसे खबर में आगे देखा जा सकता है।

आसमान से पहाड़ों पर उतारे जा रहे हैं जवान
भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड पूर्वी लद्दाख में उत्तरी सीमा पर अपने विशेष जवानों को हवाई जहाज से उतारने के अभ्यास में जुटी हुई है। भारतीय सेना ने इस अभ्यास का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिख रहा है कि कैसे लद्दाख के चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी भारतीय सेना जरूरी पड़ने पर किसी भी लोकेशन पर बहुत ही कम समय में अपने सैनिकों को उतारने में सक्षम है। यह युद्धाभ्यास सेना के रैपिड रेस्पॉन्स क्षमता की पुष्टि के लिए किया जा रहा है, ताकि वह हर समय दुश्मन की ओर से मिलने वाली किसी भी चुनौती का तत्काल और माकूल जवाब देने के लिए तैयार रहे।

14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई
भारतीय सेना ने कहा है कि '1 नवंबर (सोमवार) को सैनिकों को हवाई जहाज से 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर एक ड्रॉप जोन में उतारा गया। माहौल में पहले से ढले जवानों को विशेष वाहनों और मिसाइल डिटैचमेंट्स के साथ पांच अलग-अलग माउंटिंग बेस से सी-130 और एएन 32 एयरक्राफ्ट के जरिए लाया गया था।' गौरतलब है कि भारतीय सेना इस समय पूर्वी लद्दाख में हाई एल्टीट्यूड हवाई ड्रिल कर रही है। इस ड्रिल में पैराट्रूपर्स शामिल किए गए हैं।

शत्रुजीत ब्रिगेड के 50 पैराट्रूपर्स शामिल
जानकारी के मुताबिक दुश्मन की नाक के नीचे हो रहे इस युद्धाभ्यास में शत्रुजीत ब्रिगेड के 50 पैराट्रूपर्स शामिल हैं। इस अभ्यास की खासियत यही है कि इसमें मिसाइड डिटैचमेंट्स के साथ हाई एल्टीट्यूड के लिए बने विशेष वाहन भी विमानों से 14,000 फीट से भी ऊंचे स्थानों पर गिराए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 'इस युद्धाभ्यास का मकसद इंटर-थियेटर मूव, सटीक स्टैंड-ऑफ ड्रॉप्स, तेजी से इकट्ठा होने और चौंका देने वाली तेज गति के साथ निर्धारित लक्ष्य को हासिल करना है।' गौलतब है कि जिस तरह से पूरे एलएसी पर चीन की ओर से आक्रमकता की घटनाएं देखने को मिल रही हैं, उसके बाद इस तरह की ड्रिल का महत्त्व काफी बढ़ गया है।
शत्रुजीत ब्रिगेड का दम देखिए
बड़ी बात यह है कि ये युद्धाभ्यास ऊंचाई वाले स्थानों में माइनस 20 डिग्री तापमान पर हो रहा है, जिससे यह पता चलता है कि अगर जरूरत पड़ी तो ठंड के मौसम में भी सेना दुश्मनों को बहुत ही कम समय में जवाब दे सके। जानकारी के अनुसार 'इस अभ्यास में ऑक्सीजन कॉम्बैट फ्री फॉल जंप और एयरबोर्न फोर्स, मैकेनाइज्ड कॉलम और अटैक हेलीकॉप्टरों के जरिए एकीकृत युद्धाभ्यास शामिल है, जिससे इनकी क्षमताओं की पुष्टि हो सके और इनमें निर्बाध रूप से तालमेल बनाया सके।'

चीन की चालबाजियों पर रहेगी नजर
पिछले साल मई में चीन की सेना पीएलए ने पूर्वी लद्दाख के विभिन्न मोर्चों पर जिस तरह की चालबाजियां की थीं, उसके बाद भारतीय सेना के शत्रुजीत ब्रिगेड का उस इलाके में यह संभवत: सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन है। हालांकि, ज्यादातर गतिरोध वाली जगहों का बातचीत के जरिए हल निकल चुका है, लेकिन पूर्वी लद्दाख के उस पार अभी भी 50,000 चीनी सैनिक जमे हुए हैं और लगता है कि आने वाले ठंड के महीनों में भी वह वहां से खिसकने वाले नहीं हैं। (अंतिम तस्वीर-फाइल)












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