'नेहरू-गांधी वंश का प्रभाव', शशि थरूर ने राहुल, तेजस्वी समेत राजनीतिक 'भाई-भतीजावाद' पर सीधा हमला बोला
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान ने भाजपा को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधने का नया मौका दे दिया है। थरूर ने कहा था कि नेहरू-गांधी परिवार का प्रभाव भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा है, लेकिन इसने इस विचार को भी पुख्ता किया है कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है।
31 अक्टूबर को ओपिनियन पोर्टल 'प्रोजेक्ट सिंडिकेट' पर प्रकाशित अपने लेख में थरूर ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसे "नेपो बेबीज़" पर सीधे हमला करते हुए नेहरू-गांधी परिवार का नाम लिया। उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी, और वर्तमान विपक्षी नेता राहुल गांधी व सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा तक का उल्लेख किया।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने थरूर के इस लेख को गांधी और यादव पर सीधा हमला बताते हुए कांग्रेस पर कटाक्ष किया। पूनावाला ने सोमवार, 3 नवंबर को X पर एक पोस्ट में लिखा, "सोच रहा हूँ कि इतनी बेबाकी से बोलने के लिए डॉ. थरूर को क्या परिणाम भुगतने पड़ेंगे।"
पूर्व राजनयिक थरूर ने अपने लेख में इस बात पर प्रकाश डाला है कि ऐसे मामलों में हकदारी की भावना इतनी प्रबल होती है कि यह खराब रिकॉर्ड पर भी हावी हो सकती है। उन्होंने कहा, "यह वंशवादियों को लगातार चुनावी हार के बावजूद अपनी पार्टियों के शीर्ष पर बने रहने में सक्षम बनाता है।"
थरूर, जो 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव मल्लिकार्जुन खड़गे से हार गए थे, तर्क देते हैं कि निर्णय लेने की शक्ति एक छोटे से समूह के हाथों में है। उन्होंने लिखा, "नेतृत्व-चयन प्रक्रियाएँ अक्सर अपारदर्शी होती हैं, जिनमें निर्णय एक छोटे से गुट या यहाँ तक कि एक ही नेता द्वारा लिए जाते हैं - ऐसे व्यक्ति जिन्हें यथास्थिति बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं होती। नतीजतन, भाई-भतीजावाद आमतौर पर योग्यता को पीछे छोड़ देता है।"












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