'यूनिफॉर्म सिविल कोड' अल्पसंख्यकों के अस्तित्व को दबा देगी', गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने किया विरोध
SGPC on Uniform Civil Code, UCC: सिख समुदाय की शीर्ष संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) का कड़ा विरोध किया है।
सिख समुदाय की ओर से बोलते हुए, एसजीपीसी ने कहा है कि "भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) देश में अनावश्यक है। इसकी कोई जरूरत नहीं है।"

एसजीपीसी ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान 'अनेकता में एकता' के सिद्धांत को मान्यता देता है। अगर 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' लाया गया तो ये अल्पसंख्यकों के अस्तित्व को दबा देगी।
एसजीपीसी ने शनिवार 08 जुलाई को निकाय के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद ये बयान जारी किए हैं।
मीडिया से बात करते हुए हरजिंदर सिंह धामी ने कहा, ''यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर देश में अल्पसंख्यकों के बीच यह आशंका है कि यह संहिता उनकी पहचान, मौलिकता और सिद्धांतों को चोट पहुंचाएगी।''
बता दें कि एसजीपीसी का विरोध भी कई मुस्लिम संगठनों द्वारा दिए जा रहे तर्कों के समान ही है। मुस्लिम संगठनों का भी कहना है कि यूसीसी से अल्पसंख्यकों कमजोर हो जाएंगे।
यूसीसी के मुद्दे पर एसजीपीसी ने सिख बुद्धिजीवियों, इतिहासकारों, विद्वानों और वकीलों की एक उप-समिति का भी गठन किया है। फिलहाल उप-समिति यूसीसी को अल्पसंख्यकों के अस्तित्व, उनके धार्मिक संस्कारों, परंपराओं और संस्कृति के दमन के रूप में देख रही है।
इस समिति में एसजीपीसी महासचिव भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, वरिष्ठ सिख वकील पूरन सिंह हुंदल, एसजीपीसी सदस्य एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका, एडवोकेट परमजीत कौर लांडरां, और बीबी किरनजोत कौर, प्रोफेसर कश्मीर सिंह, डॉ. इंद्रजीत सिंह गोगोआनी, डॉ. परमवीर सिंह और डॉ. शामिल हैं।












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