सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा खुलासा- दिल्ली हिंसा से जुड़ा इंडोनेशिया और पाकिस्तान कनेक्शन
नई दिल्ली। दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाकों में हुई हिंसा पर जांच जारी है। अब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की जानकारी मिली है कि इसमें इंडोनेशिया के एक एनजीओ की भी भूमिका रही है। ये वही एनजीओ है जिसका पहले फलाह-ए-इंसानियत (एफआईएफ) से संबंध था। एफआईएफ पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का चैरिटी विंग है। पता चला है कि इंडोनेशिया के इसी एनजीओ ने दिल्ली हिंसा के नाम पर इंटरनेट के जरिए पैसे एकत्रित किए हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पैसा उन मुसलमानों को भेजने के लिए एकत्रित किया गया, जिन्होंने दिल्ली हिंसा में या तो अपने परिवार के किसी सदस्य को खोया है, या जिनके घरों को नुकसान पहुंचा है। जानकारी के लिए बता दें दिल्ली की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई है और करीब 500 लोग घायल हुए हैं। दिल्ली हिंसा के बहाने एनजीओ ने पैसा एकत्रित किया और इंटरनेट पर कुछ तस्वीरें शेयर कीं।
ये खुलासा गृहमंत्री अमित शाह के संसद में दिए बयान के एक दिन बाद हुआ है। उन्होंने कहा था कि दिल्ली हिंसा के लिए पैसा विदेश से आया था। हवाला फंडिंग मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही दिल्ली दंगे के दौरान अवैध हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे साइबर अपराधियों ने भारत और नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश की है। इन्होंने इसके लिए कनाडा, जर्मनी और अमेरिका के कई क्षेत्रों में लोगों को निशाना बनाया।
कराची स्थित ऐसे बहुत से समूहों ने अनुच्छेद 370, सीएए और दिल्ली हिंसा को लेकर काफी जहर उगला है। मिली जानकारी के अनुसार, इंडोनेशिया स्थित एनजीओ ने 25 लाख रुपये दिल्ली हिंसा के पीड़ितों तक पहुंचाने की काफी कोशिश की है। इसके लिए उसने अपने बोर्ड के सदस्यों की सहायता ली जिन्होंने स्थानीय मुस्लिम संगठनों से संपर्क साधा। इस एनजीओ ने अपने ट्विटर और अन्य प्लैटफॉर्म पर दिल्ली हिंसा को लेकर तस्वीरों और मैसेजों को पोस्ट किया। हैरानी की बात तो ये है कि एनजीओ ने इंडोनेशिया से अपनी टीम को भारत भेजने की भी योजना बनाई, ताकि स्थिति का पता लगाया जा सके।
एनजीओ को एक अत्यधिक कट्टरपंथी समूह माना जाता है और इस्लामी प्रसार के हिस्से के रूप में ये दुनिया के कई देशों में पैसा भी पहुंचाता है। इसने बांग्लादेश में कॉक्स बाजार में विस्थापित रोहिंग्या मुसलमानों के लिए एक शिविर स्थापित किया है। एनजीओ ने 2015 में लश्कर के मूल संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) को इंडोनेशिया के बांदा आचे क्षेत्र में रोहिंग्या शिविरों में गतिविधी करने में मदद की थी। इससे पता चलता है कि लश्कर रोहिंग्या समुदाय और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच अपने प्रसार का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है।
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