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Scramjet Engine: भारतीय सेना के पास है ये शक्तिशाली मिसाइल, फेल हैं 130 पाकिस्तानी मिसाइलें, डर के साए में पाक

Scramjet Engine Hypersonic Missiles: पहलगाम हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल है। पाक ने अपनी सीमाओं पर सेना के मुस्तैदी के साथ हलचल बढ़ा दी है इतना ही नहीं पाकिस्तान के मंत्री लगातार परमाणु बम की गीदड़ भभकी दे रहे हैं।

इसी बीच भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के साइंटिस्ट ने एक ऐसा कमाल किया जिससे पाकिस्तान ही नहीं बल्कि चाइना भी तिलमिला उठेगा।

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25 अप्रैल को DRDO ने हैदराबाद में स्क्रैमजेट इंजन का सफलतापूर्वक जमीनी टेस्टिंग किया जिससे भारत आसानी से हाइपरसोनिक मिसाइल बना सकता है। रक्षा सुत्रों के मुताबिक इस इंजन का 1000 सेंकेंड से ज्यादा देर तक टेस्टिंग हुई इससे पहले अमेरिका, रुस और चीन ही ऐसा करने में सफलता हासिल कर पाए हैं।

क्या है स्क्रैमजेट इंजन जिसके आगे पाकिस्तान की भारी भरकम मिसाइलें भी फेम हैं, आईए विस्तार से जानते हैं........

Scramjet Engine Hypersonic Missiles: क्या है स्क्रैमजेट इंजन?

दरअसल, स्क्रैमजेट इंजन मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाला वो इंजन है जो ध्वनि यानी साउंड से भी तेज गति में चलता है। ये इंजन हवा में मौजूद ऑक्सीजन से ही अपना फ्यूल बनाता है की, जो भारत को हाइपरसोनिक युग में ले जाने की क्षमता रखता है। इसकी ताकत इतनी जबरदस्त है कि अगर इसमें आधारित कोई मिसाइल चले, तो लाहौर से कराची तक का सफर कुछ ही मिनटों में तय कर सकती है और दुश्मन कुछ कर भी नहीं पाएगा।

ये इंजन तब काम करता है जब मिसाइल पहले से ही बहुत तेज गति पर हो। यानी यह टेकऑफ के लिए नहीं बल्कि हाइपरसोनिक क्रूज के लिए बना है। इसमें कोई घूमने वाले टरबाइन नहीं होते। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह हवा के प्रवाह को बिना धीमा किए ही, सुपरसोनिक गति में जलने देता है।

Scramjet Engine Hypersonic Missiles: कैसे काम करता है स्क्रैमजेट?

इस पॉवरफूल इंजन के आगे पाकिस्तान की सभी मिसाइलें फुस्स हैं। स्क्रैमजेट इंजन के आगे पाकिस्‍तान की लॉन्‍ग रेंज की मिसाइलें शाहीन और गौरी जिसको लेकर पाक हमेशा धमकी देते रहता है वो भी एक खिलौने की तरह काम करेंगी।

स्क्रैमजेट इंजन की खास बात ये है कि इसको अपने साथ फ्यूल लेकर घूमने की जरूरत नहीं है। बल्कि यह आसमान में ही वायुमंडल से ऑक्सीजन को तेजी से अपने अंदर खींचता है जिसके बाद इसे हाइड्रोजन जैसे ईंधन के साथ मिलाया जाता है। यह मिश्रण सुपरसोनिक गति में जलता है और अत्यधिक दबाव और गर्म गैसें पीछे फेंकता है जिसके परिणामस्वरूप वाहन माच 5 से लेकर माच 10 (6125-12250 किमी/घंटा) की गति तक पहुंच सकता है।

भारत इस तकनीक में आगे बढ़ चुका है। DRDO ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर वेहिकल (HSTDV) का सफल परीक्षण 2020 में किया था। यह भारत के भविष्य के हाइपरसोनिक हथियारों और स्पेस लॉन्च सिस्टम की नींव रखता है। भारत भविष्य में ब्रह्मोस-2 जैसी हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल लाने की तैयारी कर रहा है, जो स्क्रैमजेट तकनीक से लैस होगी और दुश्मन को संभलने का कोई मौका नहीं देगी।

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