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हम SC/ST एक्ट के खिलाफ नहीं, बस किसी निर्दोष को सजा ना मिले: सुप्रीम कोर्ट

By Dharmender Kumar
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    SC/ST Act पर Supreme Court का फैसले पर रोक लगाने से इनकार | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के फैसले को लेकर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, हम बस ये नहीं चाहते कि किसी निर्दोष व्यक्ति को इस एक्ट में सजा मिले।' केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट खुली अदालत में सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों में संशोधन के फैसले पर तुरंत बदलाव करने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर दो दिन में सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी।

    'पीड़ितों को आतंकित करने' की आजादी मिलेगी

    'पीड़ितों को आतंकित करने' की आजादी मिलेगी

    सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि एससी/एसटी कानून के कमजोर पड़ने से इस अधिनियम का उद्देश्य भी कमजोर पड़ेगा और यह आरोपी को 'पीड़ितों को आतंकित करने' की आजादी देगा। अपनी याचिका में सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 20 मार्च का फैसला एससी/एसटी समुदाय के लिए बने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों की बहाली की मांग की।

    क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    केंद्र सरकार ने उस फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधानों में संशोधन किया है। इन संशोधनों के तहत अगर आरोपी कोई सरकारी कर्मचारी है तो उसकी तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। इसी तरह अगर आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उसकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। इसके अलावा अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे।

    भारत बंद में 12 लोगों की मौत

    भारत बंद में 12 लोगों की मौत

    आपको बता दें कि एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को 'भारत बंद' किया था। इस बंद के दौरान देश के कई राज्यों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। बंद के दौरान हुई हिंसा में 12 लोगों की मौत अभी तक हो चुकी है। इनमें 8 लोगों की मौत मध्य प्रदेश, 2 की मेरठ, एक की बिहार और एक की मौत राजस्थान में हुई। बंद में उपजी हिंसा के चलते कई इलाकों में पुलिस को कर्फ्यू लगाना पड़ा।

    ये भी पढ़ें- क्या है एससी/एसटी एक्ट, जिसके लिए मचा है इस कदर हंगामा

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    English summary
    SC/ST Act: We are not against the law, but don’t want innocents to be punished says SC.
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