महाराष्ट्र राजनीतिक संकट मामले को 7 जजों की बेंच को भेजने की याचिका को SC ने ठुकराया

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़ी मामले को बड़ी संवैधानिक बेंच को तत्काल प्रभाव से सात जजों की संवैधानिक बेंच को भेजने से इनकार कर दिया हैा। महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े तमाम मामलों की सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच सुनवाई कर रही है। विधानसभा स्पीकर की शक्तियों और निष्कासन से जुड़े 2016 के नबाम रेबिया फैसले पर फिर से विचार करने के लिए सात जजों की संवैधानिक बेंच को मामला भेजने की अपील की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल के लिए इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नबाम रेबिया का फैसला सात जजों की बेंच को भेजा जाए या नहीं यह तभी तय किया जा सकता है जब महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से जुड़े मामले की उसकी मेरिट के आधार पर सुनवाई हो।
हालांकि दोनों खेमे के बीच चल रहा विवाद फिलहाल खत्म हो गया है। लेकिन स्पीकर की शक्तियों को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद अभी भी चल रहा है। इस मामले में रेबिया केस का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट की बड़ी संवैधानिक बेंच को मामला सौंपे जाने की मांग की गई थी, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि महाराष्ट्र राजनीतिक संकट की सुनवाई इसके मेरिट के आधार पर होगी। इसे फिलहाल बड़ी बेंच को भेजने की जरूरत नहीं है।
दरअसल जिस तरह से महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के बीच बगावत देखने को मिली उसके बाद शिवसेना के दो गुट बन गए और कई विधायकों को स्पीकर ने निष्कासित कर दिया था। जिसके बाद यह पूरा मामला तूल पकड़ गया था। जिसके बाद उद्धव ठाकरे का गुट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और 16 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले को सही ठहराया था। उस वक्त के स्पीकर ने इन विधायकों को अयोग्य करार दिया था, जिसमे एकनाथ शिंदे भी शामिल थे। लेकिन शिंदे खेमा ने डिप्टी स्पीकर को बर्खास्त करने का नोटिस भेज दिया।












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