'कहना तो बहुत कुछ है लेकिन खुद को रोकना पड़ा, क्योंकि...', जजों की नियुक्ति में देरी पर SC ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) की ओर से जजों की नियुक्ति को लेकर भेजे गए 70 नाम पिछले 10 महीने से पेंडिंग हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। जजों की नियुक्ति में देरी सुप्रीम कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (26 सितंबर) को कहा कि 26 न्यायाधीशों का स्थानांतरण और यहां तक कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भी लंबित है। इसको सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में "संवेदनशील" कहा है। सर्वोच्च अदालत ने इसको लेकर केंद्र से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने सोमवार को जजों की नियुक्ति पर अहम टिप्पणी। पीठ ने कहा, "नवंबर 2022 से उच्च न्यायालय कॉलेजियम से 70 नाम भेजे गए हैं, लेकिन वे हम तक नहीं पहुंचे हैं। पीठ इस मुद्दे को उठा रही हूं क्योंकि रिक्तियां एक बड़ा मुद्दा है। जो हल नहीं हो पा रहे हैं।" पीठ ने कहा कि पिछले 10 महीने से कोई नाम मिला, सिफारिश होती है और फिर नियुक्ति नहीं की जाती।

जस्टिस कौल ने आगे कहा, "मुझे बहुत कुछ कहना है लेकिन मैं खुद को रोके हुए हूं। मैं आज चुप हूं क्योंकि अटॉर्नी जनरल ने जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है। लेकिन मैं अगली तारीख पर चुप नहीं रहूंगा।"
पीठ ने जजों की नियुक्ति में देरी को संवेदनशील मुद्दा बताते हुए ये बात याद दिलाई कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक न्यायाधीश की पदोन्नति भी लंबित थी। पीठ ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जुलाई में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल को मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।
एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए 16 नाम केंद्र के समक्ष लंबित हैं। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि नियुक्तियों में देरी के मद्देनजर कई अधिवक्ताओं ने जजशिप के लिए अपनी सहमति वापस ले ली है।












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