Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

'संसद को गिरा दो...', शायरी को कोठे से निकालकर घर तक लाने वाले मुनव्वर राना ने क्यों कहा था ऐसा?

Munawwar Rana: कहते हैं काव्य-साहित्य समाज को बदलने का दम रखते हैं, बशर्ते आपकी कलम में बल होना चाहिए और इस शायर की कलम में वो ताकत थी जिसने शायरी की परिभाषा ही बदल दी।

Munawwar Rana

आपने सही समझा हम बात कर रहे हैं उर्दू-हिंदी के शानदार शायर जनाब मुनव्वर राना की, जिन्होंने 71 वर्ष की अवस्था में रविवार को दुनिया से हमेशा से विदाई ले ली।

मुनव्वर राना लंबे वक्त से गले के कैंसर से बीमार थे

आपको बता दें कि मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले मुनव्वर राना लंबे वक्त से गले के कैंसर से बीमार थे और वो पिछले 10-12 दिनों से लखनऊ के SGPGI अस्पताल में भर्ती थे। वो भले ही आज हमारे बीच सशरीर मौजूद नहीं है लेकिन जानदार लेखनी के जरिए वो हमेशा लोगों के दिलों में धड़कते रहेंगे।

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित थे राना

उर्दू साहित्य के लिए 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजे जा चुके राना साहब से पहले शायरी को टूटी हुई मोहब्बत, इंतजार, बेवफाई, जुदाई के लिए जाना जाता था लेकिन राना ने अपनी शायरी में दुनिया की जन्नत यानी की मां को जगह दी और शायरी की नई परिभाषा गढ़ दी।

शायरी को कोठे से निकालकर घर का रास्ता दिखाया

उनके बारे में कहा जाता है कि राना वो शायर थे जिन्होंने शायरी को कोठे से निकालकर घर का रास्ता दिखाया था। यूं तो उनकी बहुत सारी बेहतरीन शायरियां हैं लेकिन अपनी लेखनी के दम पर उन्होंने कई बार बवाल भी पैदा किए थे। वो अपने कुछ बयानों की वजह से वो आलोचना के भी शिकार हुए थे।

मुनव्वर राना के ट्वीट पर मचा था हंगामा

ऐसा ही एक ट्वीट था, जो उन्होंने साल 2021 में किसान आंदोलन के दौरान लिखी थी, जिस पर काफी बवाल मच गया था और हंगामा इस कदर मचा,उस ट्वीट को उन्हें डिलीट करना पड़ा था।

किसान आंदोलन पर किया था Tweet

दरअसल किसान आंदोलन के दौरान किसान दिल्ली-हरियाणा बार्डर में सर्द रात में धरना दे रहे थे और उसी वक्त देश में नई संसद का निर्माण हो रहा था, उसी लिए राना ने ट्वीट किया था..

  • 'इस मुल्क के कुछ लोगों को रोटी तो मिलेगी,
  • संसद को गिरा कर वहां कुछ खेत बना दो...
  • अब ऐसे ही बदलेगा किसानों का मुक़द्दर,
  • सेठों के बनाये हुए गोदाम जला दो...
  • मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूं,
  • गर्दन को उड़ाओ,
  • मुझे या जिंदा जला दो।'

मां पर राना ने ये पंक्तियां लिखीं जो कि अमर हो गईं

  • लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
  • बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती"

=========================================================

  • किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
  • मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

=========================================================

  • इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
  • माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+