केजरीवाल की तरह हीरो बनने की फिराक में संजय निरूपम?

मुंबई उत्तर से सांसद निरूपम ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को एक पत्र लिखकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वालों के लिए बिजली दर आधा किए जाने का हवाला दिया।
दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों का देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक से लेखापरीक्षण कराए जाने का भी आदेश दिया है और इससे भी आगे बढ़ते हुए लेखापरीक्षण शुरू होने से पहले दर घटा दी है।
निरूपम ने कहा, "हमने जब भी मुंबई में यह मुद्दा उठाया, तो घिसा-पिटा जवाब आया कि मामले को नियामक के हवाले कर दिया गया है।" लेकिन दिल्ली में तो दर घटाने से पहले नियामक से संपर्क भी नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के कदम का मुंबई के लाखों झुग्गीवासियों निम्न आय वर्ग के लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो यह समझ नहीं पा रहे हैं कि महाराष्ट्र सरकार आखिर क्यों ऐसा नहीं कर सकती है। निरुपम ने कहा कि पिछले 10 साल में मुंबई में बिजली दर चार गुणा बढ़ गई है।
संजय निरूपम के यह तीखे तेवर यह तो दर्शाते हैं कि वह भी मुंबई के लोगों के लिए परेशान होते हैं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि संजय निरूपम के यह तेवर दिल्ली में बिजली के सस्ते होने के बाद क्यों आये हैं? आखिर क्यों केजरीवाल के कदम के बाद उन्हें मुंबई के लोग याद आ रहे हैं जबकि महंगाई की मार तो मुंबई के झुग्गीवाले काफी टाइम से भुगत
रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि शायद संजय निरूपम के यह तेवर इसलिए सामने आये हैं क्योंकि वह भी लोगों की नजर में केजरीवाल की तरह हीरो बनना चाहते हैं।












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