लेबनान की सत्ता में हरीरी की वापसी, एक साल के भीतर फिर बनेंगे प्रधानमंत्री
बेरूत। अरब देश लेबनान (Lebanon) में पूर्व प्रधानमंत्री साद अल हरीरी (Saad Hariri) की सत्ता में वापसी के बाद सरकार का संकट एक बार फिर हल होता नजर आ रहा है। राष्ट्रपति मिशेल आउन ने सुन्नी इस्लामिक राजनेता हरीरी को नई सरकार के गठन के लिए प्रधानमंत्री नामित किया है।

हरीरी ऐसे समय में देश की सत्ता संभाल रहे हैं जब देश 1975-1990 के दौरान चले गृहयुद्ध के बाद सबसे बुरे दौर में है। राष्ट्रपति मिशेल आउन के बाद विचार-विमर्श के बाद हरीरी अधिकांश सांसदों का समर्थन हासिल करने में सफल रहे। इसके बाद उनकी सबसे बड़ी चुनौती लेबनान की सत्ता में साझेदारी वाली राजनीति के हिसाब से ऐसी कैबिनेट का गठन करना होगा जो देश में चल रहे बैंकिंग संकट, भ्रष्टाचारा और सालों से चल रही आर्थिक कुप्रबंधन पर कोई ठोस नीति बना सके।
सामने होगी कई चुनौतियां
नई सरकार को कोविड-19 के चलते देश में पैदा हुई परिस्थिति के साथ ही बीते दिनों बेरुत में हुए भयंकर विस्फोट के बाद बने हालात से जूझना होगा जिसमें 200 लोग मारे गए थे जबकि अरबों डॉलर की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
इसके पहले हरीरी ने जनवरी 2019 में गठबंधन सरकार बनाई थी लेकिन उसी साल अक्टूबर में हुए विरोध प्रदर्शनों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। साल भर बाद गुरुवार को एक बार फिर हरीरी को नाम राष्ट्रपति ने सामने किया है। गुरुवार को बादबा (प्रेसीडेंसियल) पैलेस में नाम की घोषणा हफ्तों तक चली राजनीतिक बैठकों और चर्चा के बाद हुई है।
कई गुटों के समर्थन से बने पीएम
हरीरी को अपनी फ्यूचर पार्टी के साथ शिया अमाल पार्टी, ड्रूज राजनेता वालिद जुम्बलॉट समेत कई छोटे-छोटे ब्लॉक्स का समर्थन प्राप्त है। वहीं शिया समूह हिजबुल्लाह ने कहा है कि वह किसी को नामित नहीं कर रहा है लेकिन प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है। हिजबुल्लाह ने कहा कि हम सकारात्मक माहौल तैयार करने में सहयोग करेंगे।
वहीं राष्ट्रपति मिशेल आउन के दामाद की अगुवाई वाले सबसे बड़ा क्रिश्चियन ब्लॉक FPM ने हरीरी के नामांकन का विरोध किया था। वहीं देश की दूसरी प्रमुख क्रिश्चियन पार्टी और हिजबुल्लाह की विरोधी लेबनीज फोर्सेज ने भी हरीरी के नाम का विरोध किया है।
बता दें कि विभिन्न धर्म समूहों की लेबनान की सत्ता में साझेदारी को लेकर देश में एक समझौता हुआ है जिसके तहत राष्ट्रपति क्रिश्चियन समुदाय से होता है तो प्रधानमंत्री सुन्नी मुस्लिम को बनाया जाता है।












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