एस जयशंकर ने विपक्ष को लगाई लताड़, कहा- 'विदेश नीति के बारे में दुनिया को ज्ञान देने से बचें'
नई दिल्ली, 07 अप्रैल। यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध पर देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को लोकसभा में भारत के रुख को सबके सामने रखते हुए उन लोगों को लताड़ लगाई जो भारत की विदेश नीति पर बिना सोचे समझे बोलते हैं। विदेश मंत्री ने जन विनाश और वितरण प्रणाली संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान सदन में बोलते हुए कहा कि 'भारत को अपना राष्ट्रहित देखना चाहिए और दुनिया को विदेश नीति पर ज्ञान देने से बचना चाहिए। सरकार पूरी तरह से कूटनीति पर केंद्रित है'।

जयशंकर ने कहा कि 'मौजूदा कानून में कुछ चीजें नहीं थीं, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूूह में भारत की सदस्यता का चीन ने विरोध किया था। लेकिन अब हम वैश्विक हथियार नियंत्रण, निरस्त्रीकरण में बहुत मजबूत हैं। 2014 में भारत एमटीसीआर, वासेनार और ऑस्ट्रेलिया का सदस्य बन गया था।'
6 मिनट में रख सकता हूं अपनी बात
सदन में पूर्व विदेश मंत्री वीके कृष्ण का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि 'उन्होंने दुनिया का सबसे लंबा भाषण यूएन में दिया था, इसके लिए उन्हें जाना जाता है, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं वही बात 6 मिनट में रख सकता हूं। हमे आज विदेश नीति पर दुनिया को ज्ञान देने की जरूरत नहीं है, हमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। अपना राष्ट्रहित देखना चाहिए। मैं चाहता हूं कि आप इसे प्रभावी करें,कूटनीति में हमारा पूरा ध्यान केंद्रित है।'
'निर्दोष लोगों की जान लेकर कोई समाधान नहीं निकलेगा'
विदेश मंत्री ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत के रुख पर बोलते हुए एक-एक सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 'हमारा मानना है कि खून बहाकर, निर्दोष लोगों की जान लेकर किसी भी तरह का कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है। आज के दौर में किसी भी विवाद का हल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। लोगों को यह समझना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कानून को दुनियाभर में लागू करने के लिए यूएन चार्टर बनाया गया है, जिससे कि सभी देशों की संप्रभुता को बरकरार रखा जा सके।'
'तुरंत हिंसा को रोके जाने के पक्ष में है भारत'
अगर भारत को कोई पक्ष लेना है तो भारत शांति का पक्ष लिया और तुरंत हिंसा को रोके जाने के पक्ष में है। यही हमारा सैद्धांति रुख है। हमने हमेशा सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसी रुख को जाहिर किया है और यूएन में भी हमने इसी रुख को सामने रखा है। कई माननीय सदस्यों ने बुचा की घटना को उठाया, मैं कहना चाहता हूं कि मैं रिपोर्ट्स को सुनकर काफी दुखी हूं, हम लोगों की हत्या की आलोचना करते हैं, यह गंभीर मामला है। हम इस मामले की स्वतंत्र जांच का समर्थन करते हैं।
बोले जयशंकर-'हमारे राष्ट्रहित में सर्वश्रेष्ठ विकल्प क्या है?'
यूक्रेन में चल रहे टकराव का दुनियाभर पर असर पड़ा है, हमारे देश पर भी पड़ा है। हम भी अपने देश पर हुए असर का आंकलन कर रहे हैं और देख रहे हैं कि हमारे राष्ट्रहित में सर्वश्रेष्ठ विकल्प क्या है। हर देश को इस हकीकत को समझना चाहिए कि वह एक दूसरे पर निर्भर हैं। देश अपने लोगों के हितों की रक्षा के लिए नीति बनाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हम देख रहे हैं कि यूरोप में भी ईंधन का लेन-देन जारी है। कुछ इसी तरह के प्रयास अलग-अलग क्षेत्रों में भारत उठा रहा है। जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, लिहाजा हम चाहते हैं कि भारत में लोगों को इसका अधिक बोझ ना पड़ें।












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