'आतंकवाद के अपराधी और पीड़ित बराबर नहीं हो सकते', मानवाधिकार परिषद के सत्र में एस जयशंकर
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मानवाधिकार परिषद के उच्च स्तरीय खंड के 46वें सत्र को संबोधित करते हुए चुनौतियों का जिक्र किया। विदेश मंत्री ने कहा का मानवाधिकार का एजेंडा लगातार गंभीर चुनौतियों का सामना करना जारी रखे हुए है। इनमें आतंववाद सबसे बड़ी चुनौती है। वैश्विक असमानता हो या सशस्त्र संघर्ष, इसकी चिंताएं हमेशा समान रूप से मजबूती से बनी हुई हैं। महामारी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

उन्होंने आगे कहा "इन चुनौतियों से पार पाने के लिए हमें साथ आने की जरूरत है। साथ ही, इनसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम होने के लिए बहुपक्षीय संस्थानों और तंत्र को सुधारने की आवश्यकता है।" विदेश मंत्री ने आतंकवाद को मानव जाति के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का जिक्र करते हुए जयशंकर ने विश्व को एकजुट होने की जरूरत पर जोर दिया। आतंकवाद के पोषक के रूप में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा "लंबे समय से पीड़ित के रूप में, भारत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में सबसे आगे है। यह तभी संभव है जब मानवाधिकार से निपटने वाले निकायों में एक स्पष्ट अहसास हो कि आतंकवाद को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है और न ही इसके अपराधियों को कभी इसके पीड़ितों के साथ बराबर स्थान दिया जा सकता है।"












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