स्वास्थ्य सुविधाओं की खस्ताहाल स्थिति के कारण झोलाछाप डॉक्टरों पर कोरोना का इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण
अस्पतालों की खस्ताहाल व्यवस्था और जानकार डॉक्टरों की कमी ग्रामीणों को झोलाछाप और बिना लाइसेंस के क्लिनिक चला रहे डॉक्टरों के पास जाने पर मजबूर कर रही है।
नई दिल्ली, 23 मई। गांव देहात में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इन इलाकों में अस्पतालों की खस्ताहाल व्यवस्था और जानकार डॉक्टरों की कमी ग्रामीणों को झोलाछाप और बिना लाइसेंस के क्लिनिक चला रहे डॉक्टरों के पास जाने पर मजबूर कर रही है। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है जहां एक पूर्व अस्पतालकर्मी बिना जानकारी और बिना लाइसेंस के सड़क किनारे खुले अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज करता दिखा। मरीज जमीन पर दरी बिछाकर लेटे हुए थे उनके पास में कीचड़ का ढेर लगा हुआ था और पूर्व स्वास्थ्यकर्मी उन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल चेक कर रहा था जिन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी।

मरीजों के झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने के लिए उन मरीजों को जिम्मेदार ठहराया जाए या उस सिस्टम को जो उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तक नहीं मुहैया करा पा रहा है। पूरा देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है ऐसे में गांव की हालत तो छोड़ो कई बड़े शहरों की स्वास्थ्य सेवाएं खस्ताहाल स्थिति से गुजर रही हैं।
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देश के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में कई क्लीनिक डॉक्टर और नर्सों के बिना ही चल रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि मरीजों को ऐसे लोगों से इलाज कराना पड़ रहा है जिन्हें इलाज की ट्रेनिंग तक नहीं दी गई है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कई मरीज जुकाम, खांसी, बुखार को सामान्य समझकर उसका सामान्य इलाज करा रहे है और जाने-अनजाने कोरोना वायरस को फैला रहे हैं। राजधानी दिल्ली से 60 किमी दूर पारसौल गांव के एक ग्रामीण अशोक ने बताया कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। हाल ही में गांव में 15 लोगों की मौत हो गई। लोगों को लगता है कि उनकी मौत कोरोना के कारण हुई है।
अशोक पास ही के एक अस्पताल में एक मरीज दो दिखाने आए हुए थे जिसे बहुत तेज बुखार था। इस अस्पताल को 1993 से एक पूर्व अस्पताल सहायक द्वारा संचालित किया जा रहा है। लेकिन उनके पास अस्पताल चलाने का लाइसेंस नहीं है और इसलिए वह प्रशासन के डर से अपनी पहचान नहीं बताना चाहते।
पूर्व अस्पताल सहायक ने कहा कि, 'आस पास के गांवों के लोग मुझे अच्छी तरह जानते हैं और मुझपर भरोसा करते हैं।' अस्पताल में आई एक अन्य मरीज को तेज बुखार था। जब उनके पति से पूछा गया कि कहीं इन्हें कोरोना तो ऩहीं? इस पर मरीज के पिता ने कहा, 'नहीं इसे कोरोना नहीं है बस हल्का सा बुखार है...हमें कोरोना संक्रमण की आशंका तो है लेकिन बड़े अस्पताल में जाना और ज्यादा खतरनाक है।' ये केवल इस गांव कि स्थिति नहीं देश के कई इलाकों की यही स्थिति है












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