मल्लिकार्जुन खड़गे के संघ पर प्रतिबंध वाले प्रस्‍ताव पर भड़के RSS महासचिव, दिया करारा जवाब

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने को कहा, इसके जवाबी कार्रवाई में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने इस बात पर कड़ा विरोध जाहिर किया। होसबोले ने कहा कि संगठन पर प्रतिबंध लगाने का कोई ठोस कारण चाहिए। हालांकि आरएसएस हमेशा से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया है , इस बात को जनता ने भी स्वीकार किया है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के बैठक में दूसरे दिन शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसबोले ने कहा प्रतिबंध लगाने का कोई कारण अवश्य होगा?

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देश के सेवा में समर्पित आरएसएस को जनता ने बहुत पहले स्वीकार कर लिया है | खड़गे ने होसबोले और संघ के लिए काम करने वालों को "महान मनुस्मृति मानने वाला" करार दिया और कहा कि ऐसा विचार कमजोर‑वर्गों व पिछड़े वर्गों के ऊपर अन्याय का संकेत है।

होसबोले ने स्पष्ट किया कि संघ ने हमेशा भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता के लिए काम किया है और लोकतांत्रिक मूल्यों को स्वीकारा है। उन्होंने कहा कि किसी प्रतिबंध का विचार मूर्खता है , क्योंकि संघ का जन‑आधार मजबूत है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने संघ के खिलाफ बयान देते हुए कहा था कि अगर संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को छुआ गया तो कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं करेगी और पूरी ताकत से विरोध करेगी।

यह बैठक आरएसएस के 100वें वर्ष पूरे होने पर कचनार शहर में सरसंघचालक मोहन भागवत के अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इसी बैठक के बाद खड़गे ने भारत की कानून व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ के लिए आरएसएस और बीजेपी को जिम्मेदार बताया था। खड़गे ने ने कहा था की अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वल्लभभाई पटेल के विचारों और बातों का सम्मान करते है , तो उन्हें आरएसएस पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए इसके साथ हे पूर्व में कानून मंत्री के द्वारा जारी किया गया बयान को भी जाहिर किया।

खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खडगे ने कर्नाटक सरकार को कहा की सरकारी स्कूलों , कॉलेजों में आरएसएस के खिलाफ कड़ा विरोध होना चाहिए और बयान दिया कि युवाओं में आरएसएस के द्वारा युवाओं को आक्रामक बनाया जा रहा है |

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1925 से 2025 तक 100 वर्ष पूरे कर लिए | इसकी स्थापना नागपुर में केशव बलिराम हेडगेवार ने किया था , संघ का मुख्य काम हिन्दू समुदाय और राष्ट्र कल्याण के लिए काम करना है | 1948 के बाद से आरएसएस कुछ वर्षों तक जांच के घेरों में घिरा रहा , कारण महात्मा गाँधी के हत्या का आरोप नाथूराम गोडसे पर था , जो आरएसएस के सदस्य थे |

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