‘समाजवादी’ ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटें संविधान की प्रस्तावना से? RSS नेता ने छेड़ी बहस, कांग्रेस से माफी की मांग

RSS general secretary Dattatreya Hosabale: आरएसएस (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने एक अहम बयान देते हुए दो बड़ी बातें कहीं -पहला, कांग्रेस को देश से आपातकाल थोपने के लिए माफी मांगनी चाहिए, और दूसरा, संविधान की प्रस्तावना में जो 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़े गए थे, उस पर अब बहस होनी चाहिए कि क्या ये अब भी जरूरी हैं?

दत्तात्रेय होसबोले ने 26 जून को डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारों में कहा, "जिन्होंने आपातकाल थोपा था, वे आज संविधान हाथ में लेकर घूम रहे हैं। उन्होंने देश से कभी माफी नहीं मांगी। अगर आपके पूर्वजों ने यह किया था, तो आप उनकी ओर से माफी मांगिए।"

RSS general secretary Dattatreya Hosabale

संविधान में कब और कैसे जुड़े ये शब्द?

1976 में जब देश में आपातकाल लगा था, तब 42वें संविधान संशोधन के जरिए 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए थे। इस पर बोलते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "इन शब्दों को जोड़ा तो गया, लेकिन उसके बाद कभी हटाने की कोशिश नहीं हुई। अब वक्त आ गया है कि इस पर एक खुली बहस हो कि क्या ये शब्द संविधान में रहने चाहिए या नहीं।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे यह बात बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर बने भवन में कह रहे हैं -और बाबासाहेब द्वारा तैयार की गई मूल प्रस्तावना में ये शब्द नहीं थे।

दत्तात्रेय होसबोले ने कहा,

''मूल संविधान की प्रस्तावना में 'सोशलिस्ट' और 'सेक्युलर' जैसे शब्द शामिल नहीं थे। इन्हें आपातकाल के दौरान उस समय जोड़ा गया, जब देश में न तो संसद स्वतंत्र रूप से काम कर रही थी और न ही न्यायपालिका पूरी तरह सक्रिय थी। ऐसे में अब यह जरूरी हो गया है कि इन शब्दों की प्रासंगिकता पर खुले तौर पर बहस की जाए -क्या ये आज भी संविधान में बने रहना चाहिए या नहीं।''

लोकसभा चुनाव और संविधान की राजनीति

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं, खासकर राहुल गांधी ने कई रैलियों में संविधान की प्रति लहराते हुए यह आरोप लगाया था कि मोदी सरकार संविधान को बदलने की साजिश कर रही है।

कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद था?

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही पत्रकार राम बहादुर राय और पूर्व भाजपा नेता केएन गोविंदाचार्य भी मंच पर मौजूद थे। ये सभी जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं, जिसने आपातकाल के खिलाफ देशव्यापी जनजागरण किया था।

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