'...बाबा साहेब का वो भाषण, जो बताएगा आजादी का मतलब', इशारों- इशारों में संघ प्रमुख का कांग्रेस पर तंज
अंबेडर जयंती पर देश में लोकतत्र पर खतरे की बाद करने वले दलों को बाबा साहेब के पार्लियामेंट में उस भाषण की याद दिलाई जिसमें उन्होंने संविधान के प्रवाधानों का अर्थ बताया।

देश विपक्षी दलों द्वारा लगातार ये केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर लोकतंत्र की हत्या और कानून को निष्प्रभावी बनाने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल के दिन अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बाबा साहेब के उस भाषण की याद दिलाई जिसे उन्होंने संविधान के अनावरण के मौके पर संसद में दिया था।
शुक्रवार संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने कहा कि हमें इन भाषणों को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल और पुण्य तिथि 6 दिसंबर के दिन पढ़ना चाहिए और आत्म निरीक्षण करना चाहिए। दरअसल शुक्रवार को वे गुजरात के अहमदाबाद में समाज संगम शक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में कहा कि लोगों को हर साल 14 अप्रैल और 6 दिसंबर को संसद में बाबासाहेब बीआर अंबेडकर के भाषणों को पढ़ना चाहिए। इस बात को लेकर आत्मनिरीक्षण किया जा सके कि क्या हम आजादी के बाद सही रास्ते पर हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, "हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी। उसके बाद, हमने डॉ. बाबासाहेब के नेतृत्व में अपने संविधान का मसौदा तैयार किया। जब उस संविधान का भारत की संसद में अनावरण किया गया, तो डॉ. बाबासाहेब ने दो भाषण दिए। बाबासाहेब के भाषण एक उस स्वतंत्रता के लिए खुद को योग्य बनाने के लिए हमारा मार्गदर्शन करें"।
उन्होंने कहा, "हमें हर साल 14 अप्रैल और 6 दिसंबर को उस भाषण को पढ़ना चाहिए और आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि हम सही रास्ते पर हैं या नहीं।" दरअसल, 14 अप्रैल को डॉ बीआर अंबेडकर की जयंती होती है जबकि उनकी पुण्यतिथि 6 दिसंबर को पड़ती है। आगे बीआर अंबेडकर के भाषणों का हवाला देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश के भीतर मतभेदों और अंदरूनी कलह के कारण ही देश विदेशी शक्तियों के अधीन हो गया था। अपने भाषणों में बाबासाहेब एकता के महत्व के बारे में बात करते हैं। वे कहते हैं कि हमारे देश को किसी शक्तिशाली बाहरी शक्ति के कारण उपनिवेश नहीं बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि यह हमारे अपने मतभेदों और अंदरूनी कलह के कारण था कि उन्होंने हमारे देश को शक्तियों के सामने पेश किया। वरना, नहीं किसी ने हमें उपनिवेश बनाने की हिम्मत की होगी।












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