'भाजपा नेताओं से गुपचुप मिलते थे चंद्रशेखर आजाद', रोहिणी घावरी के नए इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे
Rohini Ghavari Chandrashekhar Azad: रोहिणी घावरी का बड़ा दावा है कि भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद गुपचुप तरीके से भाजपा नेताओं से मुलाकात करते रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोहिणी के मुताबिक, उन्होंने इस 'गुप्त गठजोड़' का कई बार विरोध किया, मगर उन्हें चुप कराने के लिए 'विषकन्या', 'भाजपा एजेंट' और 'चरित्रहीन' तक कहा गया।
स्विट्जरलैंड में रहकर बहुजन आंदोलन से जुड़ी रहीं रोहिणी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने शादी का झांसा देकर चार साल तक उनका इस्तेमाल किया, फिर जैसे ही संसद पहुंचे, पीछे के दरवाज़े से भाजपा से मेल-जोल शुरू कर दिया। यूट्यूबर Rana Yashwant को दिए इंटरव्यू में अब रोहिणी घावरी ने वीडियो कॉल, निजी बातचीत, साथ बिताए पलों और राजनीतिक रणनीतियों पर कई बातें कही है।

1. चंद्रशेखर आज़ाद के बयान पर रोहिणी घावरी का पक्ष
रोहिणी कहती हैं, "मैं कोर्ट जाऊंगा और वहां अपना पक्ष रखूंगा। महिला आत्मसम्मान के प्रति सजग हूं।'' चंद्रशेखर का यह बयान समाज को मूर्ख बनाने की कोशिश है। सांसद सदस्यता से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मैं अपने स्वाभिमान के लिए लड़ूंगी। उनके बयानों से उनकी बौखलाहट साफ दिख रही है। अगर वह ईमानदार हैं, तो उन्हें बेखौफ होकर कोर्ट में जाना चाहिए, जैसे मैं अपने पक्ष के साथ पूरी सच्चाई से खड़ी हूं।
2. रोहिणी के पास चंद्रशेखर के खिलाफ क्या सबूत हैं?
"मैंने सोशल मीडिया पर जो कुछ भी हमारे रिश्ते को लेकर कहा है, उसके पूरे सबूत मेरे पास हैं। मैंने अपने वकील को भी वे सबूत दिखाए हैं और उनसे पूछा है कि क्या वे कोर्ट में सच्चाई की लड़ाई के लिए पर्याप्त हैं। ये सबूत किसी ब्लैकमेलिंग या साजिश के लिए नहीं बल्कि उस रिश्ते की खूबसूरत यादों को सहेज कर रखे गए थे, जो अब सबूत बन चुके हैं।"
3. मुलाकात कैसे हुई?
"जून 2021 से हमारी बातचीत शुरू हुई थी। सफाईकर्मियों के एक आंदोलन के दौरान उनसे मुलाकात हुई थी। मनीषा वाल्मीकि हत्याकांड की वजह से उस वक्त चंद्रशेखर बहुजन समाज में बड़ा नाम बन चुके थे। उन्होंने मुझे ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) तक बात उठाने का रास्ता दिखाया। तब मैं उनके संघर्ष में साथ देने लगी थी।"
4. संबंध कैसे बने?
"मैंने कभी खुद से पहल नहीं की। बात एक नेता के तौर पर शुरू हुई थी, लेकिन उनकी तरफ से पहल बढ़ती गई। वह अपनी निजी जिंदगी, संघर्ष, गरीबी की कहानियां बताते और सहानुभूति पाते। वीडियो कॉल्स और रातभर बातचीतों का सिलसिला शुरू हुआ। धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं और हम एक-दूसरे को पसंद करने लगे।"
5. BJP की एजेंट नहीं हूं
"शुरुआत में तो मैं उन्हें भाई कहती थी। अब मुझे भाजपा की एजेंट बताकर बदनाम किया जा रहा है। मुझे 'हनीट्रैप', 'विषकन्या' और 'चरित्रहीन' तक कहा गया है। क्या कोई सबूत है कि भाजपा ने मुझे भेजा या मैंने उनसे पैसे लिए? अगर हैं, तो मैं चुप हो जाऊंगी और स्विट्ज़रलैंड में गुमनामी की जिंदगी जी लूंगी।"
6. शादी का झांसा देकर बनाए संबंध?
"हमारे संबंध दिल्ली में बने, जहां हम मिलते थे। शुरू में मैं राजी नहीं थी, लेकिन चंद्रशेखर ने एक साल तक मुझे भावनात्मक रूप से तैयार किया। उसने अपनी मां से मेरी बात करवाई, शादी का झांसा दिया और भरोसा जीतकर शारीरिक संबंध बनाए। चार साल तक मेरा इस्तेमाल किया। सांसद बनने के बाद मुझे दूध में से मक्खी की तरह निकाल दिया। इसी वजह से मैं अवसाद में चली गई और स्विट्ज़रलैंड में दो बार आत्महत्या का विचार आया।"
7. शादीशुदा की बात क्यों नहीं पता चली?
"मैं केवल उनका साथ देना चाहती थी, कोई राजनीतिक पद नहीं चाहिए था। जब हम साथ नजर आने लगे तो लोग बातें बनाने लगे। उन्होंने कहा, शादी के बाद सब चुप हो जाएंगे। मैं उन पर भरोसा करने लगी।"
8. शादीशुदा होने का पता कैसे चला?
"2022 में जब चंद्रशेखर ने गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा तो नामांकन के दौरान दाखिल शपथपत्र से उनके शादीशुदा होने का पता चला। तब मैंने दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा, 'चुनाव सिर पर हैं'। चुनाव हारने के बाद मैं उनके साथ रही। फिर जब 2024 में वे सांसद बने तो मुझसे दूरी बना ली। इस रिश्ते में मुझे सिर्फ इस्तेमाल किया गया।"
9. इटली व ऑस्ट्रिया में भी मिला था चंद्रशेखर
"सितंबर 2024 में वे इटली व ऑस्ट्रिया आए, तब मैंने कहा कि यह सही नहीं है। मैं लालची होती तो उन्हें तब छोड़ देती जब 2022 में विधानसभा चुनाव हार गए थे। तब मैं स्विट्ज़रलैंड में पार्ट टाइम जॉब करती थी, लेकिन उनकी वजह से वो भी छोड़ दी थी। उनके आंदोलन में साथ देने के लिए मैं रात तीन बजे तक जागती थी, क्योंकि भारत और स्विट्ज़रलैंड के समय में अंतर है।"
10. संबंध की समय-सीमा
"जून 2021 में मुलाकात के बाद अक्टूबर 2021 में पहली बार भारत आई। उसी दौरान हमारे बीच संबंध बने। उस समय के फोटो और अन्य सबूत मेरे पास हैं जो कोर्ट में पेश करूंगी।"
11. जन आवाज़ फाउंडेशन क्या है?
"मुझे राजनीति नहीं करनी, समाज सेवा करनी है। इसलिए 2025 में 'जन आवाज़ फाउंडेशन' शुरू किया। इस एनजीओ से मैं समाज के युवाओं की मदद करती हूं। फिर भी मुझे चरित्रहीन बताकर बदनाम करने की कोशिश की गई। मेरी पूरी जिंदगी तबाह कर दी गई। अब मैं न्याय के लिए खुद खड़ी हूं।"
12. चंद्रशेखर आज़ाद और भाजपा के गुप्त रिश्ते?
"चंद्रशेखर के कई फैसलों का मैं विरोध करती थी। वह कहते थे कि मैं राजनीति नहीं समझती। लेकिन मैं भाजपा से उनके रिश्ते के खिलाफ थी। वही पार्टी जिसके खिलाफ लड़ते थे, उसी से सौदेबाजी करने लगे। वे भाजपा नेताओं से पिछले दरवाजे से मिलते थे। यही वजह थी कि वह मुझसे बहुत कुछ छिपाने लगे थे।"
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