सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या बीफ बैन पर भी होगा असर?
निजता के अधिकार का असर ना सिर्फ आधार कार्ड बल्कि बीफ बैन मामले में भी देखने को मिलेगा, आसान नहीं होगा राज्यों को बीफ बैन पर बने रहना
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया है, उसका असर कई अन्य मामलों में देखने को मिलेगा। यह फैसला ना सिर्फ आधार कार्ड बल्कि बीफ बैन मामले पर भी असर डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जो ऐतिहासिक फैसला दिया है उसमें कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकार है।

कोर्ट के इस फैसले का असर सबसे अधिक आधार कार्ड और बीफ बैन पर देखने को मिलेगा। मौजूदा कानून के अनुसार कई जगहों पर बीफ खाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन बावजूद इसके कोई भी व्यक्ति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है और इस बात का गुहार लगा सकता है कि बीफ पर प्रतिबंध उसकी निजता और खाने की पसंद पर हमला है और यह उसके अधिकारों का उल्लंघन है।
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ऐसे में कोर्ट के फैसले के बाद तमाम राज्यों को जहां बीफ बैन है अपने फैसले की समीक्षा करनी होगी। जस्टिस जे चेलमेश्वर ने अपने व्यक्तिगत फैसले में कहा है कि मुझे नहीं लगता है कि कोई भी इस बात को स्वीकार करेगा कि कि राज्य उन्हें यह बताए कि उन्हें क्या खाना चाहिए या क्या पहनना चाहिए, या फिर किससे उन्हें मिलना चाहिए, यह की सामाजिक, व्यक्तिगत और राजनीतिक दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है। बीफ के अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर आधार कार्ड पर भी देखने को मिलेगा। इस मसले को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सुना, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आधार कार्ड रहेगा, लेकिन इसके साथ कुछ दिशानिर्देश जरूर जोड़े जा सकते हैं।












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