निजता का अधिकार मौलिक है या नहीं, SC ने सुनवाई के बाद फैसला रखा सुरक्षित

निजता का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पिछले सात दिनों से चली बहस बुधवार को पूरी हो गई है।

नई दिल्ली। निजता का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पिछले सात दिनों से चली बहस बुधवार को पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया है। मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं।

निजता का अधिकार मौलिक है या नहीं, SC ने सुनवाई के बाद फैसला रखा सुरक्षित

बता दें कि आधार कार्ड से जुड़ी नागरिकों की जानकारियों के दुरुपयोग होने के संबंध में भी इस याचिका में सुनवाई है। याचिककर्ताओं की दलील थी कि आधार कार्ड के जरिए निजता के अधिकार का हनन हो रहा हैं। वहीं सरकार का इस मामले में तर्क है कि निजता का अधिकार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। अगर इसे मौलिक अधिकार मान लिया जाएगा तो कोई भी सरकार को अपने निजता का अधिकार का मामला बता कागजात या कोई अन्य जानकारी देने से मना कर देगा जिससे अराजकता कि स्थिति आ सकती हैं।

वहीं सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई को दौरान कहा कि हम चाहते हैं कि नागरिकों से जुड़ी जानकारियां जिस उद्देश्य के लिए ली जाए उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए न कि जानकारी को किसी दूसरे उद्देश्य के लिए साक्षा कर दिया जाए। जस्टिस नरिमन ने कहा निजता के अधिकार को लोगों के जानने के अधिकार के साथ संतुलन में रखना होगा।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले फर फैसला कब सुनाएगा इसकी कोई निश्चित तिथि तो नहीं है लेकिन माना जा रहा है 27 अगस्त से इस मामले पर फैसला आ जाएगा क्योंकि 27 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में बेंच को 27 अगस्त से पहले अपना फैसला सुनाना होगा।

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